बरेली। सेवानिवृत्त बेलदार को आउटसोर्स पर रखने के मामले में मुख्य अभियंता जांच के घेरे में हैं। अब उनके खिलाफ जांच कौन करेगा, इसको लेकर पेच फंस गया है। नियमों के मुताबिक मुख्य अभियंता की जांच उनके ग्रेड-पे से ऊपर का प्रशासनिक अधिकारी ही कर सकता है। ऐसे में अफसर इसको लेकर अंदरखाने मंथन कर रहे हैं। एक-दो दिनों में जांच अधिकारी नामित किए जाने की संभावना है।
नगर निगम के मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी ने 17 जनवरी को सेवानिवृत्त बेलदार भूपेंद्र कुमार को आउटसोर्स पर संबद्ध करने का आदेश जारी किया था। इसमें नगर आयुक्त के चार जनवरी के आदेश का हवाला भी दिया गया है। मामला प्रकाश में आया तो साफ हुआ कि नगर आयुक्त ने इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं किया है। खुद पर शिकंजा कसता देख मुख्य अभियंता ने आनन-फानन अपने आदेश को रद्द कर दिया था। नगर निगम में चर्चा है कि मुख्य अभियंता ने निजी स्वार्थ के लिए बेलदार को अपने कार्यालय से अटैच किया था।
पहले भी बेलदार के पास थी कार्यालय की जिम्मेदारी
सेवानिवृत्त होने से पहले भी बेलदार भूपेंद्र को मुख्य अभियंता ने कार्यालय से संबद्ध कर रखा था। वह कार्यालय में लिपिक की तरह काम देखता था। फाइलों को पास कराने तक की जिम्मेदारी उसके पास थी। इस दौरान भूपेंद्र पर कई गंभीर आरोप लगे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही, कर्मचारी को उसके मूल पद पर ही काम कराने के आदेश की भी अवहेलना की गई। अब सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा उसे कार्यालय से अटैच करने से मुख्य अभियंता शक के दायरे में आ गए हैं।
अपर नगर आयुक्त भी संदेह के दायरे में
बेलदार भूपेंद्र की ओर से नगर आयुक्त को आउटसोर्स पर रखने के लिए पत्र दिया गया था। इसके बाद नगर आयुक्त ने पत्र को पृष्ठांकित कर अपर नगर आयुक्त सुनील कुमार को भेज दिया। इसके बाद मुख्य अभियंता ने सीधे भूपेंद्र की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया। इस वजह से अपर नगर अयुक्त भी संदेह के घेरे में हैं। संवाद
मामले की जांच कराई जाएगी। प्रशासनिक स्तर का अधिकारी ही जांच करेगा। इसको लेकर विचार किया जा रहा है। एक-दो दिन में पत्र जारी कर दिया जाएगा। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त