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UP News: कौन हैं सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने यूजीसी कानून के विरोध में दिया इस्तीफा

Mon, 26 Jan 2026 04:47 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी कानून के विरोध में पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दे दिया। इससे प्रदेश के प्रशासनिक वर्ग में खलबली मच गई है। जानते हैं अलंकार अग्निहोत्री के बारे में...
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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के पीसीएस अफसर हैं। उनका कहना है कि वह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई घटना से आहत हैं। साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए कानून पर विरोध जताया। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोमवार को सोशल मीडिया पर सामने आई है, जिसमें वह पोस्टर लेकरखड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर में लिखा है कि हैशटैग यूजीसी रोल बैक..., काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।

27 मई 2025 को बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर हुई थी नियुक्ति

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कानपुर नगर के मूल निवासी अलंकार अग्निहोत्री का डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन वर्ष 2019 में हुआ था। उसके बाद से वह उन्नाव, बलरामपुर, एटा, लखनऊ में बतौर डिप्टी कलेक्टर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 19 मई 1982 को जन्मे अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर 27 मई 2025 को कार्यभार ग्रहण किया था।

 

पुनरुत्थान बरेली परिवार नाम से सोशल मीडिया पर बनाया था ग्रुप
अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर अपनी तैनाती के बाद सोशल मीडिया पर पुनरुत्थान बरेली परिवार नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। जिसमें आज उनके 529 फॉलोअर हैं। लोग उस ग्रुप पर विभिन्न तरीके की टिप्पणियां करते रहते हैं। सोमवार को उनके (अलंकार अग्निहोत्री) इस्तीफा देने की खबरें भी सबसे पहले इसी ग्रुप पर वायरल हुईं और ग्रुप पर जुड़े तमाम सदस्य अलंकार अग्निहोत्री से पद से इस्तीफा न देने की भी बातों का उल्लेख किया है। कुछ लोगों ने हिंदुत्व को धार देते हुए पद से इस्तीफा देना उचित भी बताया है और कुछ ने संवैधानिक पद पर बने रहना भी जरूरी बताया है।

यूजीसी कानून पर जताया विरोध
यूजीसी कानून पर अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि नए नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है। नए नियम छात्रों के करियर और व्यक्तिगत जीवन को जोखिम में डाल सकते हैं। इस कानून से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को शोषण होगा। इससे विषमता पैदा होगी। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के सांसद और विधायकों द्वारा विरोध दर्ज नहीं किया जा रहा है। ये एक कॉपरेट कंपनी के कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं। जब कंपनी के सीईओ नहीं बोलेंगे तब तक उनके हाथ नहीं हिलेंगे। अलंकार ने ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से इस्तीफा देक समाज के साथ खड़े होने की अपील की है।

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इस्तीफे में क्या लिखा
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मारपीट की। वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया, चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण, साधु संतों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक है और मैं (अलंकार अग्निहोत्री) स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं।

पत्र में आगे लिखा है कि घटना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्माणों का अपमान किया गया है। अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा है कि प्रयागराज में हुई घटना एक चिंतनीय एवं गंभीर विषय है और ऐसे प्रकरण इस सरकार में होना एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है। इस प्रकरण से यह प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रशासन एवं वर्तमान की राज्य सरकार एक ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है एवं साधु संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है। यूजीसी कानून पर भी विरोध जताया। 

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