बरेली। सरकारी अस्पतालों में लंबी कतार से ज्यादातर डॉक्टर मरीज को पर्याप्त समय और व्यक्तिगत ध्यान नहीं दे पाते। लेकिन इसी व्यवस्था में ऐसे डॉक्टर भी हैं जो सीमित संसाधनाें में कर्तव्य और मानव धर्म को बखूबी निभा रहे हैं। ऐसे चिकित्सक सरकारी डॉक्टरों की सकारात्मक और समर्पित छवि को मजबूत कर रहे हैं। कोई सेवानिवृत्त होने के बाद तो कोई सुरक्षित प्रसव और मासूमों की मुस्कान निखार रहा है।
अमेरिका में रहते हुए टीबी रोगियों को देते रहे परामर्श
तीन साल पहले स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त एडी हेल्थ डॉ. सुधीर गर्ग अपने घर पर टीबी के मरीजों समेत कई सामान्य मरीजों को मुफ्त इलाज संबंधी परामर्श दे रहे हैं। पांच माह अमेरिका में रहने पर भी मरीजों को व्हाट्सअप कॉल से परामर्श देते रहे। कहा, भारत और अमेरिका में दिन-रात का वक्त एक दूसरे के उलट है। इसलिए रात की कॉल का जवाब सुबह कॉल कर देते थे। कहा कि बेटा डॉ. शोभित गर्ग जो एम्स दिल्ली में डीएम (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड ह्यूमन न्यूट्रिशन) है, उसे भी अपनी तरह बनने का सीख देते हैं।
संस्थापगत प्रसव, परिवार नियोजन की जगा रहीं अलख
जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सापेक्ष नवाबगंज सीएचसी पर संस्थागत प्रसव बढ़ाने में स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनामिका गुप्ता की अहम भूमिका है। बीते वर्ष 240 सिजेरियन के अलावा कई सामान्य प्रसव कराए। परिवार नियोजन के लिए 2,022 महिलाओं की नसबंदी की। गर्भवतियों और उनके परिजन को देखभाल और पौष्टिकता, नियमित जांच, टीकाकरण का भी सेहत संबंधी परामर्श भी देती हैं ताकि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की स्थिति न रहे।
सौ से अधिक बच्चों को जन्मजात दोषों से कराया मुक्त
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रोग्राम मैनेजर डॉ. पारस गुप्ता की सक्रियता से जन्मजात दोषों से जूझ रहे 105 बच्चों को निजात मिली। डॉ. पारस के मुताबिक आर्थिक कमजोर वर्ग के बच्चे समय पर इलाज न मिलने से इस दोष से जीवन भर जूझते हैं। इसलिए टीमों को सर्वे का दायरा बढ़ाकर पीड़ित बच्चों को खोजने के लिए कहा गया। साल भर में छह बच्चों के दिल में छेद, 22 बच्चों को कटे हाेंठ तालू और 77 बच्चों को क्लब फुट, एक बच्चे को मोतियाबिंद से मुक्त कराया है।