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जहां करोड़पतियों की भरमार.. वहां भी राशन बांटे सरकार

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AITMC
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पॉश इलाकों में भी सस्ते राशन का खेल, लोग लेने आते नहीं फिर भी कोटे की दुकानों पर कुछ नहीं बचता
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अप्रैल में 414 कोटे की दुकानों से शहर के 224140 में से 207485 कार्ड पर राशन वितरण

बरेली। गांवों में लौटे हजारों प्रवासियों के पेट भरने का सवाल सरकार को परेशान कर रहा है, लेकिन फिर भी सिस्टम की नजर सरकारी राशन की लूट-खंसोट पर नहीं है। शहर की तमाम पॉश कॉलोनियों में हजारों राशन कार्ड पर कोटे के साधारण गेहूं और मोटे चावल का वितरण पूरा खेल साफ बयान कर रहा है। पूर्ति विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक इन कॉलोनियों में 90 से 95 प्रतिशत राशन कार्ड धारक कोटे की दुकानों का सस्ता राशन खा रहे हैं जबकि असलियत यह है कि इनमें से 40 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने जमाने से सरकारी राशन नहीं लिया है। इनके हिस्से का सैकड़ों क्विंटल राशन हर महीने ब्लैक मार्केट में भेजकर खपा दिया जाता है।
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राजेंद्रनगर, रामपुर गार्डन, एकतानगर, सिविल लाइंस समेत शहर में तमाम ऐसी पॉश कॉलोनियां हैं, जहां लोगों ने राशन कार्ड तो बनवा रखे हैं लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए उसकी हैसियत एक दस्तावेज से ज्यादा नहीं है। एक मोटा अनुमान है कि इन इलाकों में 40 फीसदी से ज्यादा राशन कार्ड धारक एक जमाने से कोटे की दुकानों पर राशन लेने नहीं पहुंचे हैं लेकिन फिर भी पूर्ति विभाग की अफसरों की ओर से न कभी इसका सत्यापन किया गया न उसके अनुरूप कोटेदारों का राशन का आवंटन कम किया। पॉश कॉलोनियों में भी ज्यादातर कोटेदारों की और से राशन का शत-प्रतिशत आवंटन दिखाया जाता है। जाहिर है कि ये सारा राशन बाजार में चला जाता है। पूर्ति विभाग के अफसर भी इसे बेहतर जानते हैं लेकिन पूरे खेल के तार खुद उनसे जुड़े हुए हैं लिहाजा इसे कभी बंद कराने की कोशिश नहीं की गई। ऐसे हालात में भी जब प्रवासियों के लिए राशन का इंतजाम करने में सरकार को जूझना पड़ रहा है, इस खेल को भरसक नजरअंदाज किया जा रहा है।

बोलते हैं आंकड़े.. बंटा 1.12 करोड़ किलो गेहूं, 69.14 लाख किलो चावल

लॉकडाउन के दौरान अगर अप्रैल में बंटे राशन का रिकार्ड देखें तो कोटेदारों ने 19.50 लाख किलो अंत्योदय और 81.77 लाख किलो पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को गेहूं बांटा है। इन दोनों को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा 1.12 करोड़ किलो से ज्यादा है। इसी तरह अप्रैल में अंत्योदय कार्डधारकों को 14.62 लाख किलो और पात्र गृहस्थी को 54.51 लाख किलो और दोनों को मिलाकर 69.14 किलो से ज्यादा का चावल बांटा गया है।

जांच ही नहीं करेंगे तो कैसे पता चलेगा राशन कार्ड फर्जी

पूर्ति विभाग की ओर से बड़ी तादाद में अपात्रों को राशन कार्ड जारी किए गए हैं, इसके साथ फर्जी राशनकार्ड की संख्या भी अच्छी-खासी है। इन्हीं राशन कार्ड के जरिये कोटेदार, माफिया और अफसरों का पूरा खेल चल रहा है। कोरोना की महामारी के दौरान गरीबों को सस्ता राशन देने का दबाव बढ़ रहा है, मगर फिर भी प्रशासन और पूर्ति विभाग फर्जी राशन कार्डों की जांच तक कराने को तैयार नहीं है।

लॉकडाउन यानी घटतौली का मौका

मार्च से करीब आठ लाख कार्डधारकों को सस्ता और मुफ्त राशन दिया जा रहा है। इस दौरान पूर्ति विभाग के साथ प्रशासन के पास भी बड़े पैमाने पर ऐसी शिकायतें आईं जिनमें कोटेदारों पर यूनिट कम कर देने या फिर पूरा राशन न देने जैसे आरोप लगाए गए थे। इन शिकायतों पर भी पूर्ति विभाग की ओर से कोई जांच नहीं की गई। घटतौली के कई वीडियो वायरल हुए, उनका भी संज्ञान नहीं लिया गया।

राशन वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही हैं। कोटे की दुकानों पर पॉज मशीन से राशन बंटने से हेराफेरी की गुंजाइश नहीं है। समय-समय पर जांच कर अपात्रों के कार्ड निरस्त किए जाते हैं। -सीमा त्रिपाठी, डीएसओ

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