बरेली। भारत में जन्मे योग ने पूरे विश्व को बेहतर जीवन जीने का तरीका सिखाया। योग करने वालों ने अनुभव किया कि इस भाग-दौड़ वाली दिनचर्या में भी वह स्वस्थ रह सकते हैं। योग से न केवल उनकी शारीरिक बल्कि मानसिक परेशानियां भी दूर हुईं। कई ऐसे लोग भी हैं जिनके जीवन में योग ने संजीवनी की तरह काम किया। दरअसल, दवाइयां उनके मर्ज को खत्म करने के बजाय सिर्फ दबा रही थीं। ऐसे में उन्होंने योग को अपनाया। कुछ ही समय में उनका रोग कम होने लगा। कुछ को तो ऐसी मुक्ति मिली कि उन्हें दोबारा अस्पताल भागना नहीं पड़ा। आज योग दिवस पर आपको योग के प्रति प्रेरित करने के लिए कुछ ऐसे ही चमत्कारिक फायदों वाले मामले आपके सामने हैं।
स्लिप डिस्क की समस्या को किया दूर
-रविंद्र नगर निवासी 48 वर्षीय निशु गौतम ने बताया कि उन्हें स्लिप डिस्क की समस्या थी। सभी डॉक्टर उन्हें ऑपरेशन कराने की सलाह दे रहे थे। दवा से आराम नहीं मिल रहा था। इस बीच किसी ने उन्हें योग करने का सुझाव दिया। दो साल तक उन्होंने निरंतर योग किया। उन्हें इतना फायदा हुआ कि अब वह हर साल गोवर्धन परिक्रमा भी करने जाती हैं। उनकी देखा-देखी पति हरिओम गौतम ने भी सांस संबंधित परेशानियों के लिए योग अपनाया है।
साइनस की समस्या हुई दूर, प्रतियोगिता में बनी चैंपियन
-38 साल की प्रियंका यादव को साइनस की दिक्कत थी। वर्ष 2014 से उन्होंने इसका इलाज शुरू किया। दो-तीन साल के इलाज में कभी भी उनकी परेशानी जड़ से खत्म नहीं हुई। दवाइयों के सहारे ही वह काम करती रहीं। तकरीबन तीन साल पहले उन्होंने योग करना शुरू किया। समस्या को देखते हुए प्रशिक्षक गजराज ने उन्हें लंबे समय तक सांस संबंधित कई आसन सिखाए। नतीजा ये रहा कि उनकी साइनस की समस्या तो दूर हुई ही, वह योग की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता की चैंपियन भी बन गईं।
थकान और चिड़चिड़ापन हुआ कम
-बिहारीपुर में रहने वाली 40 वर्षीय ज्योति शर्मा को पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी) की समस्या थी। इसमें महिला के शरीर में पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इससे कई तरह की परेशानियां होती हैं। वह एक साल से इलाज करवा रही थीं। किसी परिजन ने उन्हें योग अपनाने का सुझाव दिया। ज्योति बताती हैं कि शुरुआत में वह 30 मिनट योगाभ्यास करती थीं। परिवार की देखरेख के बीच योग के लिए समय निकाल पाना भी मुश्किल होता था। लेकिन, धीरे-धीरे योग उनकी दिनचर्या में समा गया। योग करने से थकान और चिड़चिड़ापन कम हुआ है। अब वह सुबह एक से दो घंटे की ट्रेनिंग के साथ शाम को भी खुद से योग कर लेती हैं।
सर्वाइकल से मिली राहत
-पुराना शहर के रहने वाली 28 वर्ष की प्रगति राज ने बताया कि वह एक साल पहले गर्दन में सर्वाइकल के दर्द से जूझ रही थीं। उन्होंने यूट्यूब की मदद से कई बार योगाभ्यास किया। कुछ समय बाद वह योग सीखने लगीं। उन्होंने बताया कि निरंतर योग करने के 15 दिन बाद से ही उन्हें फर्क महसूस होने लगा। एक समय था कि वह बिना सहारे के बैठ नहीं सकती थीं। अब वह योग के विभिन्न आसन खुद ही कर लेती हैं। प्रगति ने बताया कि तीन महीने में ही उन्हें 70 प्रतिशत तक फायदा हुआ है।
30 मिनट योग करने से रह सकते निरोग
योग शिक्षक धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि भाग-दौड़ वाले जीवन में 30 मिनट योग करने से निरोग रहा जा सकता है। शुरुआती दौर में कुछ सूक्ष्म व्यायाम करके इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उधर, शहर में क्रीड़ा भारती, जिला योग एसोसिएशन जैसी कई संस्थाएं हैं जो निरंतर शिविर लगातार लोगों को योग से जोड़ रही हैं।
सूक्ष्म व्यायाम
1- गर्दन को दायें और बायें घुमाना, ऊपर-नीचे चलाना।
2- हाथ की उंगलियों को बंद करना और खोलना।
3- कलाइयों को घुमाना
मोटापा कम करने के लिए
1- ताड़ासन, त्रियक ताड़ासन 2- त्रिकोण आसन 3- भुजंग आसन
मधुमेह के लिए
1-मंडूक आसन 2- शंशाक आसन 3- पवन मुक्त आसन 4- नौकासन
थायराइड के लिए
1- उष्टासन 2- हल आसन 3- सिंहासन 4- अर्ध चंद्रासन 5- उजायी प्राणायाम
सामान्य कमर दर्द के लिए
1- भुजंगासन 2- मकर आसन 3- मरकट आसन