छह दिनों में ही महिलाओं व सराफ समेत पूरा गिरोह त्यागी के कब्जे में था। त्यागी के मुताबिक अफसरों को शुरू में यकीन नहीं हुआ कि सही गिरोह पकड़ा गया है। इसलिए आरोपी पहले बिथरी थाने लाए गए। वहां कप्तान से लेकर आईजी तक ने पूछताछ की और बरामदगी देखकर तसल्ली की। इसके बाद त्यागी व उनकी टीम को कई इनाम व प्रशस्ति पत्र मिले।
सराफ की डायरी से मिले बदमाशों के नाम-पते
पुलिस को पहली सफलता सराफ राजू वर्मा को पकड़ने से मिली। शाहजहांपुर निवासी सराफ राजू ने कैंट के मोहनपुर में दुकान खोल रखी थी और चोरी व लूट के जेवर खरीदता था। इन बदमाशों का काफी माल राजू ने ही खरीदा था। राजू के पास डकैती के जेवर व एक डायरी मिली थी। इस डायरी में गिरोह के सदस्यों के असली नाम व पते पुलिस को मिल गए। इसके बाद वाजिद को उठाया गया और फिर हसीन समेत बाकी आरोपी मिल गए।
छैमारों पर लिखी किताब, निकालते हैं पशु-पक्षियों की आवाज
त्यागी और तत्कालीन सीओ तृतीय असित श्रीवास्तव ने कई घटनाओं पर काम के बाद संयुक्त रूप से छैमारों पर एक किताब लिखी है जो नए पुलिसकर्मियों के लिए बेहद काम आ सकती है। इसमें छैमारों के अलावा कंजड़ प्रजाति के अन्य वर्गों की खासियत और अपराध के तरीके बताए गए हैं।
बताया है कि छैमार गिरोह के लोग आसानी से लूट नहीं करते हैं। वे सोते हुए लोगों के सिर पर वार करते हैं जिससे उनके बचने की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है। ये जानवरों व पक्षियों की भाषा निकालना जानते हैं और ऐसा करके एक-दूसरे को संकेत देते हैं। हमला करते वक्त कम से कम छह वार करते हैं या घर में कम से कम छह लोगों को मारते हैं।