- 11 कॉलेजों को मान्यता दिलाई, कई करीबियों को बनवा दिया फर्जी डॉक्टर, कई फर्जी अस्पताल भी खोल डाले
बरेली। खुसरो कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी के साझीदार विजय शर्मा को नाम के आगे डॉक्टर लिखने का शौक चढ़ा तो उसने आंवला के एक कॉलेज से फर्जी डिग्री ले ली और मुन्नाभाई बन गया। करोड़ों की कमाई कर स्थापित होने के बाद उसने थोक में फर्जी डिग्रियां बांट दीं। कई मानक विहीन अस्पताल भी खड़े कर दिए।
एसआईटी प्रभारी मानुष पारीक ने बताया कि सुभाषनगर के शांति विहार मोहल्ला निवासी विजय वर्ष 2012 में एक फाइनेंस कंपनी में काम करता था। इसी दौरान बुलंदशहर के खुर्जा निवासी प्रमोद कुमार शर्मा से उसकी मुलाकात हुई। वह कॉलेजों को डीफार्मा और बीफार्मा की मान्यता दिलवाते थे। विजय उनके यहां ड्राइविंग करने लगा। इस दौरान हथकंडे सीखे और 11 कॉलेजों को मान्यता दिलाई। एक मान्यता दिलाने के लिए वह 20 से 25 लाख रुपये तक कमीशन लेता था।
प्रमोद शर्मा से अनबन के बाद उस पर डॉक्टर बनने की धुन सवार हुई। आंवला के एक कॉलेज से बिना गए नेचुरोपैथी का कोर्स किया। साथ ही, आस्था कंसल्टेंसी खोलकर फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से कॉलेजों को मान्यता दिलाने लगा। विजय खुद को बीएएमएस बताता था। वह कोलकाता की एक एकेडमी का कार्ड रखता था, जिस पर बीएसएम लिखा था। यह आईकार्ड भी फर्जी माना जा रहा है।
जाफरी ने रुपया और विजय ने लगाया दिमाग, बांटने लगे फर्जी डिग्री
इसके बाद विजय फर्जी डिग्री बांटकर करोड़ों रुपये कमाने लगा। विजय ने आला हजरत कॉलेज ऑफ फार्मेसी देवरनियां, न्यू खुसरो कॉलेज आफ फार्मेसी आंवला, मोहन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी सरदारनगर अलीगंज के छात्रों को भी फर्जी डिग्री बांटी। उसने नकल माफिया के तौर पर चर्चित शेर अली जाफरी को मोटे मुनाफे का लालच देकर धोखाधड़ी में शामिल कर लिया। जाफरी ने अपने कॉलेज, शिक्षकों, संसाधनों के दम पर विजय का साथ दिया और फिर दोनों ने एडमिशन के नाम पर कई करोड़ रुपये कमाकर संपत्ति में निवेश कर दिए।
केएम क्लासेज में बनाते थे फर्जी डिग्रियां, मिटाए सबूत
गिरफ्तार विजय शर्मा ने एसआईटी के सामने खुलासा किया कि उसने शेर अली जाफरी से मुलाकात की। कॉलेज के चेयरमैन और सचिव के साथ मिलकर डीफार्मा छात्रों के एडमिशन लिए। पहले उसका प्रयास दूर-दराज के किसी विवि से सस्ते में डिग्री दिलाने का था। ऐसा नहीं हो पाया तो मिनी बाइपास पर स्थित जाफरी टावर में संचालित केएम (खुसरो मेमोरियल) क्लासेज में बैठकर फर्जी डिग्रियां बनाईं। यहां दिखावे के लिए यूपीएससी, नीट आदि की तैयारी भी कराई जाती थी। इसी भवन में पहले जाफरी ने अखबार की छपाई के लिए प्रिंटिंग प्रेस लगाई थी। वह काम कुछ ही साल में ठप हो गया तो जींस बनाने का कारखाना भी इसी भवन में चलाया गया। विजय ने बताया कि कुछ छात्रों को उनके यहां पर फर्जी डिग्री छापने का शक हो गया था। इस वजह से वे फंस गए। इससे पहले उन्होंने यहां के कंप्यूटर समेत सारा डाटा नष्ट कर दिया।
बदलता रहता था किरदार
विजय ने खुद को सैन्य अधिकारी साबित करने की भी कोशिश की। उसने एक थार खरीदी और उस पर आर्मी लिखाकर चलने लगा। वह दूर-दराज शहरों की यात्रा इसी कार से करता था और पांच सितारा होटलों में रुकता था। गले में आला डालकर वह कभी डॉक्टर बन जाता था। रुपये कमाने के बाद विजय आसपास के लोगों को तुच्छ समझने लगा था। यही वजह रही जो विजय की मौजूदगी की सूचना पड़ोसी पुलिस को देते रहे। इसी वजह से वह पकड़ा भी जा सका। पुलिस से बचने के लिए विजय शर्मा ने अपने महंगे तीन मोबाइल फोन तोड़ दिए। छोटा मोबाइल लेकर उसमें नया सिम डाला। शाहजहांपुर, तिलहर व लखनऊ से लेकर बरेली में भी कई जगह छिपता रहा। कुछ समय तक पत्नी का मोबाइल फोन भी चलाया पर बच न सका।
फर्जी एनओसी लगाकर ली मान्यता
विजय से पूछताछ में इनपुट मिला है कि उसने जिन कॉलेजों को वैध मान्यता दिलाई है, उनमें भी फर्जीवाड़ा कर दिया है। एनबीसी के मानकों के हिसाब से अग्निशमन व अन्य विभागों से एनओसी मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में उसने संबंधित विभागों की मुहर बनवा ली थी। वह कॉलेज वालों से रुपये लेता था और फर्जी तरीके से एनओसी तैयार कर देता था। बताते हैं कि संबंधित विभाग के लोगों की भी वह सेवा करता रहता था। अब नए आरोपियों के नाम केस में शामिल कर गैंगस्टर एक्ट के तहत उनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी। अमर उजाला ब्यूरो