बरेली। चार माह पहले जिले के एक कोटेदार के यहां से भरे गए गेहूं के नमूने की जांच में कीड़े निकलने की पुष्टि हुई है। जांच में इसे असुरक्षित माना गया है। बीते दिनों रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को मिली, पर तब तक खाद्यान्न का वितरण हो चुका था।
लखनऊ स्थित गवर्नमेंट पब्लिक एनालिस्ट लैब की रिपोर्ट के अनुसार बरेली के खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से भरा गया गेहूं का नमूना 21 अक्तूबर को प्राप्त हुआ था। इसकी जांच में जीवित और मृत कीड़े मिले। फूड एनालिस्ट निगार फात्मा ने जांच में दावा किया है कि जांच में जो कीड़े मिले हैं, उनका सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। रिपोर्ट जब तक जारी होकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के पास पहुंचती, तब तक खाद्यान्न का वितरण हो चुका था।
कोटे पर बंट रहे खाद्यान्न की जांच की मांग
दस दिन पहले वकील दर्शन सिंह ने इसी जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए एडीएम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। कहा था कि एक कोटेदार के यहां दिए जा रहे खाद्यान्न में कीड़े निकलने की पुष्टि हुई है। बताते हैं कि जिस कोटेदार के यहां गेहूं के नमूने में कीड़े मिले थे, उसके खिलाफ एडीएम सिटी कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है। प्रकरण का संज्ञान लेकर प्रत्येक तहसील में कोटे पर वितरित खाद्यान्न का औचक नमूना भरवाकर जांच की मांग की थी। एडीएम प्रशासन दिनेश ने एफएसडीए को पत्र अग्रसारित कर नियमानुसार कार्रवाई के लिए कहा है।
एफसीआई गोदाम से आता है खाद्यान्न
जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह के मुताबिक कोटेदारों के पास भारतीय खाद्य निगम से खाद्यान्न पहुंचता है। जिले में एफसीआई के छह गोदाम रसुइया, सीबीगंज, परसाखेड़ा, बहेड़ी, भुता और रिछा में हैं। कोटेदार कोई खाद्यान्न कहीं से खरीदता नहीं, बल्कि एफसीआई गोदाम से ही उसे उपलब्ध कराया जाता है। फरवरी में एफएसडीए ने जांच की तो कहीं कीड़े नहीं मिले हैं, बल्कि खाद्यान्न में टूटन मिली है।
-
पूर्व में लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट में खाद्यान्न में कीड़े मिलने की पुष्टि हुई है। नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। - अपूर्व श्रीवास्तव, जिला अभिहित अधिकारी