बरेली। राज्यकर संबंधी समस्याओं से व्यापारियों को राहत दिलाने के लिए जीएसटी में एमनेस्टी स्कीम लागू करना या करदेयता अवधि बढ़ना जरूरी है। द जीएसटी बार एसोसिएशन ने बुधवार को इस संबंध में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और जीएसटी काउंसिल के चेयरमैन को पत्र भेजा है।
अध्यक्ष राजेश गुप्ता की ओर से भेजे गए पत्र के मुताबिक जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के बाद इसमें संशोधित का विकल्प नहीं है। अर्थदंड के प्रावधान जटिल हैं। सात वर्ष गुजरने पर भी ट्रिब्यूनल का गठन नहीं हुआ। लिहाजा, व्यापारियों को अपील का अधिकार नहीं मिल सका है। पूर्व में पुराने वार्षिक विवरण दाखिल करने, पुरानी अपीलों को दायर करने के लिए एमनेस्टी स्कीम यानी लेट पेनॉल्टी में सशर्त छूट मिलती थी, उसे फिर से शुरू करना जरूरी है। एक्ट में मर्यादा अधिनियम का प्रावधान न होने से अपील दायर नहीं होती।
भेजे गए पत्र में केंद्र सरकार से जीएसटी अधिनियम की धारा-73 में न्यूनतम 10 हजार रुपये के अर्थदंड को कम करने, गाइडलाइन में क्रमवार बदलाव बंद हो, नियम सहज बनाने की मांग की है।