अवैध खनन को लेकर योगी सरकार ने भले ही यूपीकोका कानून बनाकर सख्ती का संदेश दिया है, लेकिन बरेली में इस कारोबार पर अंकुश लग पाना बेहद मुश्किल दिख रहा है। शहर और ग्रामीण इलाकों में होने वाले अवैध खनन में सीधे तौर पर सत्ता के जुड़े नेता शामिल रहे हैं। जब प्रदेश में सपा की सरकार थी, तो उनकी पार्टी के दिग्गज अवैध खनन करा रहे थे।
प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद के सत्ता के जुड़े नेता अवैध खनन का कारोबार में लगे हैं। दो नंबर की मोटी कमाई का यह धंधा सपा नेताओं से ट्रांसफर होकर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के पास पहुंच गया। पिछले दिनों आंवला के सांसद धर्मेंद्र कश्यप के घर आ रहीं दो ट्रैक्टर- ट्रालियां अवैध खनन में पकड़ने जाने के बाद प्रशासन ने शुरू में तो तेजी दिखाई थी, लेकिन बाद में प्रशासन ने बैकफुट पर आकर मामूली जुर्माना लेकर ट्रैक्टर-ट्रालियों को छोड़ दिया था। हालांकि बाद में खनन अधिकारी वाईएन राम को नेताओं के काम में अड़ंगा लगाने का खामियाजा भी उठाना पड़ा था। इसे लेकर सांसद के साथ बिथरीचैनपुर विधायक राजेश कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल भी आ गए थे। उनकी फोन पर खनन अधिकारी के नोंकझोंक भी हुई थी। नेताओं के सहारे उनके चेले भी खनन के धंधे में पूरी तरह से लगकर मोटी कमाई करने में लगे हैं। योगी सरकार की अवैध खनन पर सख्ती करने के बाद 1500 से 2000 रुपये तक मिट्टी की ट्राली बिक रही है। इसलिए नेताओं का खनन की तरफ ओर भी ज्यादा ध्यान है।
10 ट्राली के बहाने हो रहा खनन
सरकार ने किसानों के लिए 10 ट्राली मिट्टी का खनन करने के लिए किसी की मंजूरी नहीं लेने का एलान किया है। इसी उदारवादी रवैये का फायदा उठाकर माफिया खनन करा रहे है। दस ट्राली की परमीशन लेकर 100 ट्राली मिट्टी खनन करके बेच देते हैं। जबकि प्रशासन और पुलिस सब कुछ जानते हुए चुप्पी साधे है।
यह हैं खनन के गढ़
रामगंगा किनारे के सराय तलफी, चौबारी, ऊंचा गांव, बुखारा, हिंडौलिया, भोलापुर, रोठा, सैफिया हुसैनपुर, जोगीठेर, हरूनगला, पदारथपुर नकटिया, पदारथपुर, बालीपुर, केसरपुर, अहलादपुर, मुड़िया अहमद नगर, भूड़ा, टिसुआ के अलावा बहेड़ी, आंवला, मीरगंज, नवाबगंज में भी नदियों से भी खनन हो रहा है।