करोड़ों के खेल के चलते अब तक रामगंगा के किनारे गुरऊ गांव में ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने पर अड़े रहे नगर निगम के अधिकारियों ने इसके लिए कहीं और जमीन की तलाश करने की कोशिश ही नहीं की लिहाजा अब जल्द ही उसके लिए दिक्कत खड़ी होने वाली है। नगर आयुक्त को 19 सितंबर को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) में पेश होकर ट्रंचिंग ग्राउंड के मसले पर अपना जवाब दाखिल करना है। गुरऊ में ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने की योजना किसानों के विरोध के चलते अटक कर रह गई है। संभावना जताई जा रही है कि एनजीटी में नगर निगम गुरऊ के किसानों के विरोध का जिक्र करते हुए ट्रंचिंग ग्राउंड की जमीन की तलाश के लिए और मोहलत लेने की कोशिश कर सकता है।
बाकरगंज ट्रंचिंग ग्राउंड की मियाद खत्म होने के बाद भी यहां लगातार कूड़ा डाला जा रहा है। समाज सेवा मंच ने इसके खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की थी। एनजीटी ने नगर निगम को बाकरगंज का विकल्प बताने को कहा है, इसे लेकर लगातार सुनवाई चल रही है। नगर निगम ने पहले बभिया को ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए उपयुक्त बताया था लेकिन दो जिलाधिकारियों की रिपोर्ट में इसे वेटलैंड बता दिया गया जिसके बाद इसका नाम ट्रंचिंग ग्राउंड से हटा दिया गया।
नगर निगम ने इसके बाद रामगंगा के किनारे बसे गुरऊ गांव की जमीन पर ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने कोशिश की लेकिन किसानों के विरोध के चलते यहां भी मामला अटक गया है। हालांकि इस जमीन के लिए सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एयरफोर्स और वन विभाग से नगर निगम को मौखिक सहमति मिल चुकी है। नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव का कहना है कि एनजीटी में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए गुरऊ जमीन से जुड़ी समस्या भी बताई जाएगी।
बता दें कि रामगंगा किनारे पिछले सालों में भूमाफिया से साठगांठ के चलते अंधाधुंध ढंग से जमीनों का सर्किल रेट बढ़ाया गया है। किसानों की ज्यादातर जमीन यहां भूमाफिया किस्म के लोग हथिया चुके हैं। ऐसे में अगर यहां ट्रंचिंग ग्राउंड बनाया जाता है तो शासन के चार गुना मुआवजा दिए जाने की नीति के चलते भूमाफिया को ही अरबों रुपये का लाभ होगा। किसानों का आरोप है कि साठगांठ के चलते अधिकारियों को भी इसमें से करोड़ों रुपये अपनी जेब में आने की उम्मीद है। इसी कारण वे रामगंगा किनारे ही ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
बाकरगंज ट्रंचिंग ग्राउंड की मियाद बढ़ाने का भी करेंगे जिक्र
नगर निगम प्रशासन ने एक माह पहले पोकलैंड मशीन से बाकरगंज में कूड़े के ढेर को बराबर करना शुरू कर दिया था ताकि बाकरगंज में कुछ और समय तक कूड़ा फेंका जा सके। नगर निगम की ओर से एनजीटी में यह भी बताया जाएगा कि जब तक ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए जमीन नहीं मिल रही है तब तक बाकरगंज में कूड़ा फेंका जा सकता है।