तीन दिन तक लगातार बारिश से हुई फसलों की बर्बादी की भरपाई की आस लगाए बैठे जिले के 3.32 लाख किसानों को बीमा कंपनी ने ऐसा झटका दिया है जिससे वे पूरे साल नहीं उबर पाएंगे। दरअसल बीमा कंपनी ने इन किसानों का प्रीमियम ही जमा नहीं कराया, लिहाजा वे बीमा की पात्रता में ही नहीं आ रहे हैं। ऐसे में उन्हें बारिश से बर्बाद हुई गन्ना और धान की फसलों का क्लेम मिलना ही संभव नहीं रह गया है। यही वजह है कि अब बीमा कंपनी की ओर से सर्वे के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जा रही है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के 4.68 लाख किसानों में से 1.04 लाख किसान गन्ने की खेती करते हैं। 14 हजार किसान बागवानी के साथ अन्य फसलों का उत्पादन करते हैं। परंपरागत फसलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या करीब साढ़े तीन लाख है। नियमों के मुताबिक खरीफ सीजन शुरू होते ही जुलाई में इन सभी किसानों की फसलों का बीमा किया जाना चाहिए था, लेकिन बीमा कंपनी ने सिर्फ 17 हजार किसानों का फसल बीमा किया और 3.32 लाख किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने की जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली।
बैंकों ने नहीं किया खातों का नवीनीकरण
अब प्रीमियम न जमा होने का ठीकरा भी किसानों के ही सिर फोड़ा जा रहा है। बीमा कंपनी बजाज आलियांज के राज्य कोआर्डिनेटर अनिल कुमार का कहना है कि केसीसी धारक उन्हीं किसानों का प्रीमियम कटता है जिनके खातों का नवीनीकरण होता है। चूंकि बैंकों ने खातों का नवीनीकरण नहीं किया, इसलिए उनके प्रीमियम की कटौती नहीं की गई। हालांकि केसीसी धारक किसानों की संख्या सिर्फ एक लाख ही है। बाकी किसानों के प्रीमियम के लिए बीमा कंपनी को खुद उनसे संपर्क करना था।
ऐसी बीमा कंपनी जिसके पास संसाधन तक नहीं
शासन ने जिस बीमा कंपनी को फसल सुरक्षा बीमा के लिए चुना है, उसके पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं है। कंपनी ने एक कोआर्डिनेटर के अलावा तीन ब्लॉकों पर एक-एक व्यक्ति रखा है जबकि जिले में 15 ब्लॉक हैं जिनमें अकेले धान का एरिया ही 1.59 लाख हेक्टेयर है। बाकी खरीफ की फसलों का एरिया अलग है। इस तरह तीन लाख से ज्यादा किसानों की शिकायतों का निस्तारण और दो लाख हेक्टेयर एरिया का सर्वे मात्र चार लोग कर रहे हैं।
बीमा कंपनी तो शासन से नामित, हम क्या करें
जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामतेज यादव इस मसले पर दो टूक कहते हैं कि फसल सुरक्षा के लिए कंपनी को शासन ने नामित किया है। फसल बीमा भी बीमा कंपनी को ही करना था। उनकी भूमिका तो फसल नुकसान का सर्वे कराकर रिपोर्ट देने की ही है। उन्होंने बीमा कंपनी के स्थानीय और राज्य प्रतिनिधियों से बात कर तुरंत नुकसान का सर्वे कराने को कहा है। उधर, बीमा कंपनी बजाज आलियांज के स्टेट कोआर्डिनेटर अनिल कुमार का कहना था कि कितने किसानों का बीमा हुआ और कितना प्रीमियम जमा किया गया, यह कृषि विभाग बताएगा। उनके पास न ये आंकड़े हैं न ये आंकड़े जुटाना उनकी जिम्मेदारी है।