सरकार किसानों, शादी वाले परिवारों तथा कर्मचारियों को एडवांस वेतन के आदेश तो कर दिए हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर बैंकों के पास धनराशि नहीं हैं। इतना ही नहीं ग्राहकों को पता चल गया है कि बैंकों में पैसा ही नहीं है तो लाइन लगाना भी कम कर दिया है। बुधवार को पूरे दिन बैंकों में यही नजारा देखने को मिला। अधिकांश ग्राहक बैंकों के अंदर अधिकारियों से कैश की जानकारी करने आए लेकिन कैश न होेने पर मायूस होकर लौट गए। पूरे दिन में करीब 11 लोगों ने पुराने 500 और एक हजार के नोट बदले।
बड़ा डाकखाना स्थित पीएनबी, ओबीसी सिविल लाइन, डीडीपुरम, बैंक आफ बड़ौदा सिविल लाइन, पुराना शहर, किला, सीबीगंज, शहामतगंज, कुतुबखाना, माडल टाउन स्थित एसबीआई और पंजाब एंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक रामपुर बाग, बैंक आफ इंडिया आदि चार दर्जन शाखाओं में सुबह से ही कैश की किल्लत दिखी। नगदी बदलने पहुंचे लोगों को पता चला कि कैश नहीं है तो लाइन लगाने दूसरी शाखा में पहुंचे। वहां भी पता चला कि उनके यहां भी कैश नहीं हैं तो मायूस होकर लौट गए। यही स्थिति चेक से केश लेने वालों की बनी रही। उन्हें मांग के अनुरूप आधा अधूरा कैश मिला, एटीएम व्यस्त जरूर थे लेकिन लाइनें कम थीं। क्योंकि उनमें भी दो घंटे बाद कैश खत्म होने की शिकायत बनी रही।
जमा राशि 78 करोड़
नोट बदली 2.5 करोड़
लोग पहुंचे 11 हजार
कर्मचारियों के वेतन को कहां से आएंगे 60 करोड़
कैश किल्लत से जूझ रहे बैंकों के सामने अब एक और नया संकट हो गया है। सेना, केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों को इसी सप्ताह 10 हजार रुपये एडवांस भुगतान करना है। एयरफोर्स, रेलवे, सेना, आईवीआरआई आदि केंद्रीय विभागों ने एसबीआई पर दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि इनके अधिकांश खाते एसबीआई में खुले हुए हैं। इन कर्मचारियों के लिए कम से कम से कम एक अरब रुपया बैंक प्रबंधन को जुटाना है।
बरेली में केंद्र, सेना, शिक्षक और राज्य सरकार के करीब 50 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें कुछ पेंशन भोगी भी शामिल हैं। उनकी पेंशन भी दी जानी है। इसको लेकर संबंधित बैंकों में संकट बना हुआ है और वह अपने उच्च अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं कि किस तरह एडवांस भुगतान किया जाए। इस मांग को पूरा करने के लिए बैंकों ने अभी से धन सुरक्षित करना शुरू कर दिया है। नोट बदली पर अंकुश लगा दिया है और चेक से भुगतान लेने वालों को आधा अधूरा दे रहे हैं।
बचत योजनाओं में जमा नहीं हो पाएंगे 1000-500 नोट
एसबीआई के डीजीएम सुनील वढ़ेरा ने बताया कि जन धन योजना में एक हजार और पांच सौ के नोट जमा कराए जा सकते हैं लेकिन डाक विभाग और बैंकों की ओर से संचालित योजनाओं में यह करेंसी जमा नहीं की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पीपीएफ, सुकन्या, सावधि, एनएससी, बीमा आदि बचत योजनाओं में 500 और ़1000 के नोट जमा नहीं होंगे। उधर, जिला लीड बैंक प्रबंधक ओपी वढ़ेरा ने बताया कि जनधन खातों पर कोई रोक नहीं लगी है। इस स्कीम के खातेदार 500 और 1000 के पुराने नोट निर्धारित सीमा के अंदर जमा कर सकते हैं। इनको बैंकों की ओर से अनुमन्य सुविधाएं मिल रही है। ओबीसी ने अपनी 41 शाखाओं में खुले सभी जनधन खातों का ब्योरा इनकम टैक्स विभाग को आंकड़े सौंप दिए हैं। आंचलिक प्रबंधक मनोज वर्मा ने बताया कि करीब 6 हजार जनधन खातों में 22 लाख रुपये जमा किया गया है। आयकर विभाग जांच शाखा अन्य बैँकों से भी ब्योरा जुटाने में जुटा है।