जंगल से रास्ता भटक गए नेपाली हाथी
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नेपाल के जंगल से रास्ता भटककर पिछले चार दिन से जिले के ग्रामीण इलाकों में डेरा जमाए दो उत्पाती हाथियों को वापस भेजने में यूपी के वनकर्मी फेल हो गए हैं। असम से बुलाई गई हाथी एक्सपर्ट की एक टीम शनिवार यहां पहुंच गई। अब हांका के एक्सपर्ट के रूप में पश्चिम बंगाल से छह वनकर्मियों की टीम को भी बुलाया गया है जो रविवार शाम तक पहुंच जाएगी।
करीब दस दिन पहले रास्ता भटककर नेपाल के दो हाथी पहले पीलीभीत के टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में पहुंचे फिर वहां से उत्तराखंड की सीमा से सटे अमरिया क्षेत्र से होते हुए 27 जून को बहेड़ी क्षेत्र में घुस गए थे। ये हाथी अब तक एक वन रक्षक समेत चार लोगों को मार चुके हैं। पिछले चार दिन से दोनों हाथी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पात मचा रहे हैं। इससे संबंधित इलाकों में दहशत है। हाथियों की दहशत से निजात दिलाने को मंडल ही नहीं लखीमपुर खीरी और सीतापुर के वनकर्मियों की टीम पहले से लगी हुई है।
उत्तराखंड और दिल्ली से कई वन्यजीव विशेषज्ञों के अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी समेत झांसी व गोंडा के मुख्य वन संरक्षक भी जुटे हैं। शुरू से ही वन विभाग के अधिकारी ऑपरेशन हांका के तहत दोनों हाथियों को वापस नेपाल भेजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही है।
हकीकत यह है कि जिन वनकर्मियों को इस कार्य में लगाया गया है वह ऑपरेशन हांका के लिए प्रशिक्षित ही नहीं हैं। यही वजह है कि वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबी फौज के बाद भी ये हाथी अब तक नहीं लौट सके। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस सच को दबी जुबान में स्वीकार किया है।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बुलावे पर असम से हाथी के एक्सपर्ट के रूप में डॉ. कुशल कुंवर शर्मा शनिवार रात अपनी टीम के साथ यहां पहुंच गए हैं। मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा ने बताया कि पश्चिम बंगाल में ऑपरेशन ‘हांका’ के लिए प्रशिक्षित वनकर्मी हैं।
उन्होंने वहां के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर उनसे एक टीम मांगी है। जिस पर पश्चिम बंगाल से ऑपरेशन हांका के लिए छह वनकर्मियों की हांका टीम वहां से शनिवार दोपहर चल दी है, जिसके रविवार शाम तक यहां पहुंचने की संभावना है। टीम के आने के बाद ऑपरेशन हांका शुरू कर दिया जाएगा।