बरेली। पैगम्बर-ए-इस्लाम की 1501वीं यौम-ए-पैदाईश का जश्न शान-ओ-शौकत के साथ मनाया गया। बुधवार को अंजुमन खुद्दामें रसूल की ओर से शहर में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया।
कोहाड़ापीर के मंच पर आला हजरत दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां ने सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी को परचम-ए-रिसालत सौंपा। इसके बाद मुफ्ती अहसन मियां ने सुबुर रजा को परचम सौंपकर जुलूस रवाना किया।
यहां से दरगाह प्रमुख व साहिबे सज्जादा की कयादत में जुलूस अपने कदीमी रास्तों कोहाड़ापीर से कुतुबखाना, जिला अस्पताल रोड, कोतवाली व नावल्टी के रास्ते दरगाह हजरत पहलवान साहब पहुंचा। यहां सलामी देने के बाद राजकीय इंटर कॉलेज, खलील स्कूल तिराहा से करोलान, बिहारीपुर ढाल होता हुआ देर रात दरगाह आला हजरत पहुंचकर संपन्न हुआ।
जुलूस का रास्ते में जगह-जगह फूलों से इस्तकबाल किया गया। स्वागत करने वालों में सभी समुदाय के लोग शामिल रहे। रंग-बिरंगी पोशाक, पगड़ी व जुब्बा पहने लोग अंजुमन की शक्ल में ‘सरकार की आमद मरहबा-दिलदार की आमद मरहबा’, ‘खुशियां मनाओ सरकार आ गए’ आदि नारों के साथ जुलूस में शामिल हुए।
सबसे आगे परतापुर जीवन सहाय की अंजुमन रजा-ए-मुस्तफा व रेलवे जंक्शन की अंजुमन अनवारे मुस्तफा चली। नारों के बीच तमाम अंजुमनों के सदस्य दुरूदो सलाम पढ़ते चले, तो रसूल की शान नात भी गूंजती रहीं। जुलूस में खूबसूरत पोशाकों में शामिल नन्हें बच्चे और मजहबी झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
जुलूस से पहले की गई दस्तारबंदी
जुलूस से पहले स्टेज पर तिलावत-ए-कुरान मुफ्ती जईम रजा ने किया। नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया गया। मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी व मुफ्ती अय्यूब खान नूरी, मुफ्ती जमील रसूले पाक की जिंदगी पर रोशनी डाली और कहा कि नबी-ए-करीम ने दुनियावालो को अमन-शांति का पैगाम दिया। खुसूसी दुआ मुफ्ती आकिल रजवी ने की। मंच पर सुब्हानी मियां, मफ्ती अहसन मियां व सैयद आसिफ मियां व सभी अंजुमनों के सदर का अंजुमन खुद्दामे रसूल के सचिव शान अहमद रजा ने दस्तारबंदी कर फूलों से इस्तकबाल किया।
ये अंजुमनें हुईं शामिल
नासिर कुरैशी ने बताया कि जुलूस में मुख्य रूप से अंजुमन अनवारे मुस्तफा, गौसुल वरा, आशिकाने रजा, जानिसारान-ए-रसूल, कुर्बान-ए-रसूल, रजा-ए-मिल्लत, फैजुल कुरान शामिल रही। जुलूस की व्यवस्था राशिद अली खान, जावेद खान, अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, शाहिद नूरी, परवेज नूरी आदि ने संभाली।
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अनवर मियां ने अंजुमनों को किया रवाना
बरेली। अंजुमन-ए-गुलामाने रसूल की ओर से किला क्षेत्र की सभी अंजुमनों का इस्तकबाल किया गया। अंजुमन के सदर की दस्तारबंदी कर इनाम से नवाजा गया। यहां से दरगाह वली मियां के सज्जादानशीन अनवर मियां ने अंजुमन को रवाना किया। अंजुमन-ए-गुलशन-ए-वली मोहम्मद, अंजुमन राह-ए-खुदा, अंजुमन इश्क-ए-रसूल, अंजुमन आशिक-ए-रसूल, अंजुमन आशिक-ए-बिलाल, अंजुमन सिद्दीक-ए-अकबर आदि किला से गुजरीं। इस मौके पर सईद अहमद, सैयद नाजिर अली, मोहम्मद उस्मान, बाबू भाई, अतीक, रहमत, मुस्तकीम, जाकिर अहमद आदि मौजूद रहे।
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पगड़ी बांधी तो किसी ने तोहफे देकर किया स्वागत
बरेली। शहर में निकाले गए जुलूस-ए-मोहम्मदी का सामाजिक संगठनों ने जगह-जगह स्वागत किया। किसी ने पगड़ी बांधी, किसी ने फूल बरसाए तो किसी ने तोहफे और मिठाइयां बांटीं। मोहिब्बाने गाजी ओ सकलैन फाउंडेशन की ओर से कुतुबखाना चौराहे पर जुलूस-ए-मोहम्मदी का इस्तकबाल किया गया। दरगाह शाह शराफत मियां पर फैजाने शाह सकलैन फाउंडेशन की और से जुलूस में शामिल सभी अंजुमनों का स्वागत किया गया। ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी (आरएसी) की ओर से बिहारीपुर ढाल पर अंजुमनों के सदर की दस्तारबंदी की गई। नावल्टी चौराहे पर बरेली हज सेवा समिति और जनसेवा टीम के अध्यक्ष पम्मी खां वारसी के नेतृत्व में पुष्पवर्षा कर जुलूस-ए-मोहम्मदी का स्वागत किया गया।