बरेली में सोमवार को जाड़े के इस सीजन में सबसे ज्यादा सर्द दिन के तौर पर दर्ज किया गया। सूर्य की किरणें पूरे दिन आसमान पर छाई कोहरे की घनी चादर तो वेधने में नाकाम रहीं। कोहरे की वजह से तड़के करीब छह घंटे तक दृश्यता शून्य रही। हिमालय से चार से छह घंटे प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही पछुवा को बर्फीली हवाओं का साथ मिला तो बीते 24 घंटे में अधिकतम तापमान ने 4.3 डिग्री सेल्सियस का गोता लगा दिया और 15.1 से गिरकर 10.8 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। गलन के प्रकोप से लोग बेहाल हो गए।
डा. गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (पंत नगर) के कृषि वेधशाला की रिपोर्ट के अनुसार बरेली समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आसमान में काफी नीचे करीब दो किमी से भी ज्यादा मोटाई की कोहरे की चादर बनी हुई है। इसके चलते सूर्र्य की रोशनी धरती तक नहीं आ पा रही है। इसका नतीजा यह रहा कि दिन में भी दृश्यता 100 मीटर तक नहीं पहुंच पाई। रविवार रात एक बजे से सोमवार सुबह करीब सात बजे तक दृश्यता शून्य रही। दिन में कोहरा कुछ छंटा लेकिन दृश्यता 50 मीटर से ज्यादा नहीं बढ़ पाई।
बरेली मौसम विभाग कार्यालय सूत्रों के अनुसार रविवार को 8.2 डिग्री के मुकाबले न्यूनतम तापमान और गिरकर 7.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। पहाड़ों से बर्फीली हवाओं की आमद यहां अगले 24 घंटे बने रहने का अनुमान है। ऐसे में अगले 24 घंटे में मौसमी मिजाज में कोई सुधार नहीं होने वाला।
मौसम विशेषज्ञ की टिप्पणी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले 24 घंटे के दौरान मौसम का मिजाज खासा बिगड़ा रहेगा। आसमान में करीब ढाई किमी मोटी कोहरे की घनी चादर बनी हुई है। हिमालय से तराई में पहुंच रही सर्द हवाओं की ठंडक इसे और बढ़ा रही है। ऐसे में अभी कोहरे और जनसामान्य को असहज करने वाली गलन बनी रहेगी। -डॉ. एचएस कुशवाहा, कृषि वेधशाला प्रभारी, डा. गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंत नगर