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अगले दो दिन में हो सकती है भारी बारिश

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बरेली। मानसून भले ही लेट आया, लेकिन साथ झमाझम बारिश लाया है। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से बरेली समेत दो दर्जन से अधिक जनपदों में मध्यम और भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अलर्ट जारी किया गया है। जारी अलर्ट में अगले 48 घंटे में भारी बारिश की संभावना बताई गई है।
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बुधवार को आधी रात के बाद अचानक बारिश होने लगी। बृहस्पतिवार की सुबह तक रुक-रुककर कभी धीमी तो कभी तेज बारिश होती रही। थोड़ी देर बाद करीब साढ़े तीन बजे बारिश थम गई। बृहस्पतिवार की सुबह पांच बजे फिर काली घटाएं छा गईं और छह बजे के बाद तक बारिश होती रही। बारिश से मौसम खुशगवार हो गया। बाद में भी अधिकांश समय बादल छाए रहे। शाम साढ़े नौ बजे के आसपास फिर बारिश शुरू हो गई। देर तक बारिश होने का अनुमान है।
बारिश के चलते बृहस्पतिवार को दिन का तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जो सामान्य से 3.0 डिग्री सेल्सियस कम था। न्यूनतम तापमान 22.7 डिग्री सेल्सियस था, जो सामान्य से 3.0 डिग्री कम था। तापमान में 3.0 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने से गर्मी और उमस गायब हो गई। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा ने बताया कि 11 से 17 जुलाई तक बारिश होती रहेगी। अगले चार दिन भारी बारिश की संभावना है। उधर, लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से 11 जुलाई की आधी रात से 13 जुलाई तक बरेली, पीलीभीत, खीरी, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, सीतापुर, गोंडा, रायबरेली, अयोध्या, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर, बलिया, गोरखपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, संत रविदास नगर आदि जनपदों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
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धान समेत सभी खरीफ फसलों को फायदा
आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रनजीत सिंह का कहना है कि पिछले सप्ताह से अच्छी बारिश हुई है। यह धान लगाने का सही समय है। किसान वर्षा का पानी खेत में रोककर पलेवा करें और धान की पौध लगाएं। खेत की मजबूत मेढ़बंदी होने से बारिश का पानी खेत में रुकेगा। रोपाई से पहले 55 किलो डीएपी और 20 किलो यूरिया के अलावा 40 किलो म्यूरियेट ऑफ पोटाश खेत में डालें। 22 से 25 दिन की पौध में रोपाई करें। एक स्थान पर दो पौधे रोपें। इससे कल्ले अच्छे निकलेंगे।
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार पौध के ऊपर एक तिहाई पौधे तोड़कर पौधशाला में ही फेंक दें। ऐसा करने से फसल में तनाछेदक या झुलसा रोग का प्रकोप कम होगा। तनाछेदक अपने अंडे पौधशाला में ही पत्तियों के नीचे देंगे। इससे बाकी पौधे इस रोग से मुक्त रहेंगे। झुलसा रोग का रोगाणु पत्तियों की नोक पर शुसुप्तावस्था में रहता है। वह अनुकूल मौसम में वहीं से फैलता है। धान के अलावा अन्य खरीफ फसलों के लिए यह बारिश प्रकृति का वरदान है। किसानों का डीजल बचेगा और फसल की लागत में कमी आएगी।

सब्जियों को नुकसान
मध्यम या भारी बारिश से सब्जियों को नुकसान होगा। लौकी और खीरा वाले खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए। भारी बारिश होते ही किसान सब्जी के खेत से पानी निकासी के तुरंत इंतजाम करें। इनकी बेलों की जड़ों पर मिट्टी डाल दें। अन्य सब्जियों जैसे कद्दू, टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन, आलू के खेत में भी पानी का ठहराव न करें। ऐसा करने से सब्जियों के सड़ने का खतरा रहेगा। नई सब्जियों की बुवाई ऊंचे खेतों या मेड़ पर करना उचित रहेगा।
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