बरेली। कूड़ा प्रबंधन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो गए। इसके बाद भी शहर को कचरे से निजात नहीं मिली। सथरापुर में इनका ठोस कचरा प्रबंधन संयत्र संचालित नहीं हो सका। ज्यादातर मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर भी बंद पड़े हैं। बाकरगंज में कचरे का पहाड़ स्मार्ट सिटी की व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है। अब कचरा प्रबंधन के नाम पर गोवा में तमाशा होगा। वहां प्रस्तावित दो दिवसीय कार्यशाला में देश-विदेश की 40 निजी कंपनियां मंथन करेंगी। इसकी मेजबानी भी बरेली को मिली है। प्रदेश से बरेली के साथ ही आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों को इसमें प्रतिभाग के लिए बुलाया गया है। दावा है कि बरेली स्मार्ट सिटी की ओर से कूड़ा निस्तारण और प्रबंधन के लिए निजी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए प्रोजेक्ट बनाए गए हैं। इससे जहां शहर स्वच्छ होगा, वहीं रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
स्मार्ट सिटी का दूसरा चरण लागू होने से पहले इकोनॉमी इंडस्ट्रीज वर्कशॉप का आयोजन गोवा में 21 व 22 नवंबर को किया जाएगा। बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ संजीव कुमार मौर्य अपने सहयोगी अधिकारियों के संग गोवा के लिए रवाना हो चुके हैं। वर्कशॉप में स्मार्ट सिटी के अधिकारी तैयार की गई परियोजनाओं का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेेशन देंगे। निजी कंपनियों के अधिकारियों को शहर की आधारभूत सुविधाओं और अब तक कूड़ा निस्तारण के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी भी दी जाएगी। निजी कंपनियां क्या तकनीक अपनाएंगी? इस पर भी मंथन होगा।
इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट पर काम कराने की तैयारी
प्रथम चरण में बरेली में 980 करोड़ खर्च कर 65 परियोजनाओं पर काम कराया गया। अब दूसरे चरण में इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट व टेक्नोलाॅजी पर काम होगा। इसके लिए 150 करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार की गई हैं। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए प्रस्ताव मांगे थे। कार्यशाला में इससे जुड़े प्रोजेक्ट भी सामने आएंगे। अमर उजाला ब्यूरो
कार्यशाला के जरिये निजी कंपनियों का निवेश आया तो शहर में आधारभूत सुविधाओं को विस्तार मिलेगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल व हवाई यात्रा के साथ सड़क परिवहन को भी आसान बनाने के लिए आगे बढ़ना है। - संजीव कुमार मौर्य, सीईओ, बरेली स्मार्ट सिटी कंपनी