बरेली। स्मार्ट सिटी की सड़कों पर 16 करोड़ रुपये खर्च करके लगाई गईं स्ट्रीट लाइटें रोशनी देने के साथ ही हादसों को भी दावत दे रही हैं। वजह है कि पोल के निचले हिस्से में लगाए गए केबल बॉक्स खुले पड़े हैं। कई जगह तार भी नंगे हैं। बारिश के मौसम में खुले तारों की यह स्थिति लोगों के लिए खतरा बन सकती है।
विकास भवन के पास लगी स्ट्रीट लाइटों के पोल से तार बाहर आ रहे हैं। इससे लोगों को करंट लगने का खतरा बना हुआ है। श्यामगंज पुल के पास मौजूद कई स्ट्रीट लाइटों के पोल से बॉक्स के कवर गायब हैं, तो कहीं तारों को चलताऊ तरीके से बांध दिया गया है। इन इलाकों में लोगों की पैदल आवाजाही भी होती है। अगर ऐसे में कोई खुले हिस्से के संपर्क में आता है तो बड़ा हादसा हो सकता है।
शहर में लगातार हो रही बारिश के चलते यह अधिक चिंता का कारण बन रहे हैं। खंभों के आसपास पानी जमा होने या नमी रहने के कारण करंट फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति राहगीरों और छोटे बच्चों के लिए जोखिम भरी है।
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि खुले पड़े केवल बॉक्स की जानकारी है। टीम को भेजकर उन्हें ठीक कराया जाएगा।
नालों की सुरक्षा रेलिंग उखड़ी तो कहीं लगी ही नहीं
सेटेलाइट पर हुए हादसे के बाद नगर निगम की ओर से शुरू की गई कवायद अब तक अधूरी
बरेली। सेटेलाइट पर मार्च में एक व्यक्ति के खुले नाले में गिरने के बाद नगर निगम ने 10 लाख रुपये खर्च कर नालों पर रेलिंग लगाई गई थी। दावा किया था कि इससे हादसे रोकने में मदद मिलेगी। अब तक यह कवायद अधूरी है। कई जगह रेलिंग लग ही नहीं पाई है। जहां लगी भी उनमें से भी ज्यादातर जगहों पर उखड़ गई है।
बारिश में जलभराव के दौरान नाले और सड़क में अंतर ही नहीं पता चल पाता। इसके चलते दो दिन पहले सुभाषनगर में एक ई-रिक्शा नाले में पलट गया। हादसे में पांच लोग घायल हो गए।
मंगलवार को की गई पड़ताल में कई जगह ऐसा ही हाल मिला। चौपुला चौराहे पर पुरानी पुलिस लाइन के पास गहरा नाला है। यहां पर रेलिंग लगाई गई थी, लेकिन कई जगह की रेलिंग टूट चुकी है।
मिशन अस्पताल के पास भी गहरा नाला है। यहां भी सफाई के दौरान टूटी हुई रेलिंग अब तक सही नहीं हुई है। बीसलपुर रोड पर भी रेलिंग टूटी पड़ी है। निगम के एक्सईएन राजीव राठी ने बताया कि जिन नालों रेलिंग टूटी है, उन्हें सही कराया जाएगा।