चुनाव में अभी तक मतदान के लिए ईवीएम ही एक मात्र सहारा है, जिस पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदाता केंद्र तक जाना होता है। कई लोग ऐसे भी होते हैं जो मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते हैं। लोगों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए कई विश्व विद्यालयों में ई-वोटिंग मॉड्यूल पर रिसर्च चल रही है। काफी कामयाबी मिली है। अब इस मॉड्यूल की सिक्योरिटी और लोगों के बीच विश्वसनीयता पर कार्य चल रहा है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो विदेश में बैठा मतदाता भी अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वहीं से वोट कर सकेगा।
यह कहना है ट्रिपल आईटी इलाहाबाद इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग के हेड, नेटवर्क कमेटी के चेयरमैन और वायरलेस सेंसर नेटवर्क तथा क्रिप्टोग्राफी क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में रिसर्च के लिए प्रसिद्ध प्रोफेसर शेखर वर्मा का। प्रो. वर्मा शनिवार को बरेली के एक शिक्षण संस्थान में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे।
प्रो. वर्मा ने बताया कि ई-वोटिंग पोर्टल पर डाटा स्टोरेज की सीमा असीमित होगी। क्लाउड कंप्यूटिंग बेस्ड सर्वर से विशेष पहचान प्राधिकरण (आधार) को जोड़ा जाएगा ताकि फर्जी वोटिंग न हो सके और वैध मतदाता की पहचान हो सके। इसके अलावा वोटर आईडी कार्ड को भी इससे जोड़ने पर रिसर्च जारी है। पोर्टल पर वोटिंग की तारीख और समय पर वोटिंग की सुविधा भी मिलेगी। खास यह कि कंप्यूटर से लेकर स्मार्टफोन तक आप अपना लॉगइन करके वोट डाल सकेंगे। इस पर पहचान भी गुप्त रहेगी और वोटर को बाकायदा स्लिप भी मिलेगी कि उसने किस पार्टी के उम्मीदवार को वोट किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां इंटरनेट की सुविधा नहीं है वहां के लिए एसएमएस की सुविधा होगी, लेकिन इसके लिए मतदाता की पहचान का ही मोबाइल कनेक्शन वैध माना जाएगा।