इसमें कोई शक नहीं कि सपा जिलाध्यक्ष और उनके समधी महिपाल सिंह ने मिलकर पंचायत चुनाव में सपा का झंडा बुलंद किया। यहां प्रशासन और पार्टी पर उनकी पकड़ है और पार्टी में भी विरोध के स्वरों को वह लगातार दबाने में कामयाब रहे लेकिन अब पार्टी ने बिथरी और आंवला से विधानसभा चुनाव का टिकट थमाकर समधियों को अग्निपरीक्षा में उतार दिया है। ये वो सीटें हैं जहां सपा पिछली बार की अखिलेश की लहर में भी नहीं जीत पायी थी।
वीरपाल सिंह एक बार बिथरी में तब बसपा प्रत्याशी रहे धर्मेेंद्र कश्यप से मात खा चुके हैं। धर्मेंद्र सजातीय कश्यप बहुल सीट होने के बावजूद जब सपा से लड़े तो बसपा के खिलाफ माहौल के बावजूद वीरेंद्र सिंह ने उन्हें हरा दिया। बसपा और सपा से होते हुए धर्मेंद्र अब भाजपाई हो चुके हैं और आंवला के सांसद हैं। जाहिर है भाजपा भी उनके और दूसरे नेताओं के प्रभाव का लाभ लेने के लिए इस मैदान में ताल ठोंकेगी। यहां का मुस्लिम वोटर अगर किसी हवा में बह गया या कि कोई वोट काटने वाला मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में आ गया तो वीरपाल के लिए और मुश्किल हो सकती है। पंचायत चुनाव में तीन में से दो ब्लाकों में सपा का प्रमुख होना भी एक गणित है लेकिन विधानसभा चुनाव में फैसला धरातल पर होता है।
आंवला सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव को प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की मर्जी न होने के बावजूद सपा से टिकट मिल गया था। अखिलेश यादव ने डॉ. विक्रम सिंह को टिकट दिया था लेकिन सैफई से पैरवी करके महिपाल उनका टिकट कटवाने में कामयाब रहे लेकिन तीसरे स्थान पर रहे। इस वजह से अखिलेश यादव की नाराजगी उनसे काफी समय तक बनी रही लेकिन इस बार सपा ने फिर उन्हें उतार दिया है, यह जानते हुए भी कि भाजपा आंवला से मौजूदा विधायक और प्रदेश अध्यक्ष के दावेदार धर्मपाल सिंह को जिताने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
सपा ने पहली सूची में जिले की जिन चार सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं, उन पर पार्टी पिछले चुनाव में हार गई थी। कैंट से प्रत्याशी बनाए गए हाजी इस्लाम बब्बू का नाम पार्टीजनों के लिए ही चौंकाने वाला है। वह सिर्फ निगम के पार्षद रहे और पार्टी में कभी किसी अहम पद पर भी नहीं रहे। पार्टी के स्थानीय संगठन से भी उनका नाम नहीं भेजा गया था। जबकि दावेदारों में महानगर अध्यक्ष जफर बेग भी थे। शहर से उतारे गए शेर अली जाफरी बसपा में रहे हैं। दोपहर तक खबर थी कि वह बसपा से मैदान में आ रहे हैं लेकिन शाम को सपा की सूची में उनका भी नाम था।
सुल्तान बेग के लिए गुंजाइश
सपा ने हारी हुई सीटों में से सिर्फ मीरगंज से ही अपना प्रत्याशी तय नहीं किया है। हालांकि यहां हाजी गुड्डू दावेदार थे, ऐसे में बसपा विधायक सुल्तान बेग के सपा में आने के कयासों को अब और मजबूत माना जाने लगा है। जिला पंचायत चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर बसपा का स्थानीय संगठन बेग के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर चुका है। माना जाने लगा है कि सपा ने मीरगंज से प्रत्याशी न उतारकर सुल्तान बेग के लिए गुुंजाइश बना रखी है।