बरेली। वायरल ऑडियो से विद्युत निगम में खलबली मची है। विभागीय जांच में सामने आया है कि मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर वसूली करने वालों का सिंडिकेट सक्रिय है। वायरल ऑडियो में भूरा और नवाब का नाम पहले ही सामने आ चुका है, अब जांच में कई और के नाम भी उजागर हुए हैं। प्रथम दृष्टया जांच में आया है कि सिंडिकेट के मुखिया का हर उपकेंद्र में एक खास व्यक्ति बैठा है। इसका खुलासा होने के बाद जांच टीम इन संविदा कर्मियों की सूची तैयार करने में जुटी है।
मंगलवार को विद्युत निगम की एचआर टीम को रिश्वत देने वाले का एक ऑडियो वायरल हुआ था। इसमें चेकिंग में पकड़ी गई बिजली चोरी को 12 हजार में निपटाने की बात कही जा रही है। यह मामला सामने आते ही मुख्य अभियंता ने अधीक्षण अभियंता को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया, जिन्होंने जांच कमेटी गठित की है। अधिकारियों के मुताबिक, भ्रष्टाचार का यह छोटा मामला नहीं है। बिजली चोरी के मामलों को निपटाने के लिए पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है। जांच में नवाब व मुखिया के नाम सामने आए हैं। संवाद
-
सिंडिकेट के दो मेंबर, एक को सब बुलाते चीफ साहब
सिंडिकेट के दो मेंबर सात माह से एचआर टीम से जुड़े हैं। जांच में स्पष्ट हुआ है कि ऑडियो में नाम उजागर होने वाला नवाब और एक अन्य संविदा कर्मी (अधिकारियों का कथित भतीजा) सात माह से एचआर टीम में शामिल है। वहीं, तीसरे शख्स जिसका नाम सामने आ रहा है, वह अधिकारियों का खास बताया गया है। जो एचआर टीम में आने से पहले मुख्य अभियंताओं के यहां माली का काम करता था। वहीं उसे पूरा विभाग ही चीफ साहब बुलाता है।
-
निर्दाेष हैं तो कार्रवाई करते, कार्यालय नहीं बुलाते: मुख्य अभियंता
मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने कहा है कि इसमें संविदा कर्मचारी ही नहीं स्थायी कर्मचारियों के भी संलिप्त होने की संभावना है। अगर यह लोग निर्दोष हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने अधीक्षण अभियंता से कहा है कि एचआर टीम के अधिकारियों से भी स्पष्टीकरण लिया जाए। छापे के बाद नाम, पता, वीडियो होने पर उपभोक्ता को कार्यालय किस वजह से बुलाया जाता है? अभी तक संबंधित उपभोक्ता पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और हुई है तो किस दिन क्या कार्रवाई है? मुख्य अभियंता इसी के आधार पर शासन को रिपोर्ट भेजेंगे।
मामले में जांच टीम गठित कर दी गई है। एक अन्य व्यक्ति का नाम सामने आया है, जो सिंडिकेट चला रहा है। अभी तक जांच में इन कर्मचारियों को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है। स्थायी अधिकारियों की भी संलिप्तता सामने आ रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- ब्रह्ममपाल, अधीक्षण अभियंता व जांच अधिकारी