विप्रा को अधिकारी बताकर किसान का ट्रैक्टर बिकवाया
संभल जिले के थाना रजपुरा क्षेत्र के गांव नरियावली निवासी प्रवेश कुमार ने इंस्पेक्टर बारादरी को बताया कि उन्होंने बेटे धर्मेंद्र की नौकरी की बात वरुण पाठक से की थी। वरुण ने बताया कि उसकी पत्नी शिखा की बहन विप्रा शर्मा एसडीएम हैं। विप्रा से मुलाकात कराई तो दस लाख रुपये मांगे। प्रवेश ने ट्रैक्टर बेचकर और कर्ज लेकर ये रकम विप्रा को दे दी।
जून 2022 में पहला नियुक्ति पत्र आया। इसके बाद समय-समय पर नियुक्ति पत्र आते रहे। प्रवेश अपने बेटे को लेकर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के लखनऊ दफ्तर गए। वहां पता चला कि सभी पत्र फर्जी व कूटरचित हैं। जब विप्रा शर्मा, वरुण पाठक, शिखा पाठक, वीरेंद्र शर्मा से रुपये मांगे तो वे धमकी देने लगे।
विप्रा ने ड्राइवर बनाकर घुमाया, फिर उसी को लगाया चूना
बरेली के जगतपुर मोहन तालाब निवासी अमान ने इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह को बताया कि वह ड्राइविंग करते हैं। वर्ष 2025 में विप्रा का स्थायी ड्राइवर कहीं चला गया था। तब वह अमान को बतौर ड्राइवर साथ लेकर गई थी। विप्रा ने खुद को एसडीएम बताया और अच्छा व्यवहार कर उसे झांसे में ले लिया। कई जगह उसे ले गई तो उसका रुतबा देखकर वह प्रभावित हो गया।
फिर एक दिन विप्रा ने सरकारी नौकरी लगवाने की पेशकश की। अमान ने इंतजाम कर एक लाख रुपये दिए तो विप्रा ने फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा। अमान शाहजहांपुर के तिलहर ब्लॉक गए तो पता चला नियुक्ति पत्र फर्जी है। रुपये वापस मांगे तो विप्रा ने जेल भिजवाने की धमकी दी। इस पर वह खामोश बैठ गया। अब गैंग का भंड़ाफोड़ होने पर अमान ने भी रिपोर्ट दर्ज करा दी।