प्रेम के प्रतीक ग्रह शुक्र 13 दिसंबर को अस्त हो जाएंगे, साथ ही 16 दिसंबर से धनु की संक्रांति भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में विवाह जैसे मांगलिक कार्य एक बार फिर वर्जित हो जाएंगे। यह स्थिति छह फरवरी तक रहेगी।
पंडित रमाकांत दीक्षित ने काशी विश्व पंचांग और महावीर पंचांग का हवाला देते हुए बताया कि इस बार 16 नवंबर से 12 दिसंबर तक ही शादी के मुहूर्त हैं। इसके बाद 13/14 दिसंबर से शुक्र अस्त हो जाएंगे। 16 दिसंबर से धनु की संक्रांति भी लग जाएगी। ऐसे में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। छह फरवरी तक ग्रहों की यही स्थिति रहेगी। उन्होंने बताया कि 16 नवंबर से पहले तुला की संक्रांति थी। इस दौरान भी विवाह करना उपयुक्त नहीं रहता है। पंडित सुशील पाठक के मुताबिक, धनु की संक्रांति पौष (पूस) में पड़ती है, इसलिए इस माह को खरमास के नाम से भी जाना जाता है। इस पूरे माह में शुभ कार्य और विवाह आदि वर्जित होता है। इसके अलावा शुक्र तारा भी डूब जाएगा जो छह फरवरी 2018 को उदय होगा। लिहाजा इसके बाद सात फरवरी से शुभ लग्न शुरू होंगे। पंडित सतेंद्र मोहन शास्त्री और पंडित अशोक चंद्र तिवारी ने बताया कि शुक्र अस्त होने के चलते विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं।
इंसेटबिना मुहूर्त के भी होती हैं शादियां
ज्योतिषाचार्य डॉ. बीके शर्मा का कहना है कि आज के दौर में कुछ लोग उन्मुक्त हो चुके हैं, इसलिए वे मुहूर्त को उतना जरूरी नहीं समझते हैं। ऐसे लोगों ने अपने हिसाब से कानून बदल लिए हैं। अब लोग यातायात, मौसम आदि को देखकर और अपनी सुविधा के मुताबिक मांगलिक कार्यक्रम कर लेते हैं।