सुन्नी मुसलमानों के मरकज और बरेलवी सिलसिले के मुख्य केंद्र आला हजरत दरगाह के सज्जादा का पद छोड़ने सेे पहले मौलाना सुब्हानी मियां ने शुक्रवार को उलमाए अहले सुन्नत और अवाम-ए-अहले सुन्नत के नाम अहम पैगाम दिया। इसका सार यह रहा कि आतंकी इस्लाम का नाम बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें वह नकली और नाम निहाद इस्लाम नहीं चाहिए जो .. तालिबान, अलकायदा और आईएसआई जैसे खूंखार आतंकवादियों के नाम और चेहरे से पहचाना जाता है।’ उन्होंने आला हजरत की वसीयत का उल्लेख किया, ‘अगर किसी को अल्लाह व रसूल की शान में अदना सा भी गुस्ताख पाओ तो वह तुम्हारा कैसा ही करीबी रिश्तेदार क्यों न हो, उसे अपने से दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंको।’ उन्होंने आतंकी संगठनों से अपने समाज और नौजवानों को दूर रखने को कहा।
सुब्हानी मियां ने मुसलमानों को संदेश दिया कि अपने मुल्क में प्यार-मोहब्बत की फिजां बनाएं, गैर मुस्लिम भाइयों से अच्छे मुआमलात रखें, इस्लाम के तआल्लुक से उनकी गलतफहमियों को दूर करें एवं उनके साथ मिलकर मुल्क का चैन-सकून खत्म करने और मुल्क में फसाद करने वालों के खिलाफ एकजुट होकर मुहिम चलाएं। साथ ही हर तरह के आतंकवाद चाहे वह नकली और नाम निहाद इस्लाम के नाम पर हो या हिंदुत्व के नाम पर हो, उसकी एक साथ मुखालफत करने को कहा। उन्होंने इश्को मुहब्बत पर आधारित उस सूफियाना इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने को कहा जो इस्लाम के मानने वालों को अपने रसूल, सरकार-ए-आला हजरत, सरकार-ए-हुज्जतुल इस्लाम और सरकार-ए-मुफ्ति-ए-आजम हिंद से मिला है। उन्होंने कहा कि यह इस्लाम पूरी दुनिया में अदब, ऐहतराम और मुहब्बत के साथ शांति फैलाने का पाठ पढ़ाता है।
अहम पैगाम के अन्य प्रमुख बिंदु
तलाक
एक बार में तलाक देने के रिवाज से घर, खानदान और पूरा समाज टूटता जा रहा है। .. अव्वल तो तलाक देना ही बुरा काम है। अगर निभाव मुश्किल हो तो एक ही बार में तीन तलाक न दें क्योंकि यह तलाक की सबसे बुरी किस्म है।
नशाखोरी
शराब, नशाखोरी जैसी खतरनाक बीमारी समाज को खोखला कर रही है। इसके खिलाफ एकजुट होकर मुहिम चलाएं। नबी के हदीसों का मफहूम है कि शराबी जब शराब पीता है तो उससे नूर-ए-ईमान रुखसत हो जाता है।
दुष्कर्म, जिनाकारी
दुष्कर्म और जिनाकारी (नाजायज संबंध) समाज में नासूर बनता जा रहा है। आलिमों, इमामों और मजहबी लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि इस नासूर को खत्म करने की मुहिम चलाएं और नौजवानों को बताएं कि ये इतना बड़ा गुनाह है कि इस्लाम ने गैर शादीशुदा जिनाकारों के लिए सौ कोड़ों और शादीशुदा जिनाकारों के लिए रज्म (पत्थरों से मारकर खत्म देना) की सजा रखी है।
सूदखोरी
आज मुसलमानों में सूद लेने और देने की बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है। इसके खात्मे को भी एकजुट होकर मुहिम चलाएं और बताएं कि सूदी लेनदेन कितना बड़ा गुनाह है।