बरेली। गुलाबनगर स्थित दरगाह हजरत बशीर मियां का उर्स कुल की रस्म के साथ संपन्न हुआ। इसमें बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत कर अकीदत का इजहार किया।
दरगाह के मौलाना मुकीम मियां बशीरी ने हजरत मोहम्मद बशीर मियां की शख्सियत को बयान किया। उन्होंने कहा कि बशीर मियां का लंगर दुनियाभर में मशहूर है। वहीं, नातो मनकबत का नजराना पेश किया गया। उर्स के आखिरी दिन कार्यक्रम की शुरुआत सुबह कुरआन ख्वानी से हुई।
दरगाह शाह शराफत मियां के सज्जादानशीन मोहम्मद गाजी सकलैनी उल कादरी ने बशीर मियां की दरगाह पर चादरपोशी व गुलपोशी कर दुआएं खैर की और सलाम पेश किया।शाम चार बजकर 30 मिनट पर हजरत मोहम्मद बशीर मियां के 78 वें कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। आखिर में लंगर व तबर्रूक बांटा गया।
व्यवस्था प्रभारी अहमद उल्लाह वारसी ने बताया कि रविवार को सुबह 10:30 बजे खास तबर्रुक की जियारत कराई जाएगी। डॉ. सैयद शकील अली, ताजीम मियां, साबिर बशीरी, मौलाना मुकीम मियां बशीरी, हाजी नज्म शम्सी आदि अकीदतमंद मौजूद रहे।
हजरत शाह मोहम्मद बशीर मियां का सालाना उर्स खानकाह सकलैनिया शराफतिया पर भी मनाया गया। कुल की फातेहा साहिब-ए-सज्जादा गाजी मियां व हाफिज गुलाम गौस सकलैनी ने पढ़ी। कुल शरीफ के बाद गाजी मियां हजरत बशीर मियां की दरगाह पहुंचे। संवाद
मुसलमानों के हालात तब सुधरेंगे जब हम दीन पर चलेंगे : हसीब मियां
बरेली। आला हजरत खानदान की अजीम शख्सियत हजरत अल्लामा हबीब रजा खां का तीन दिवसीय उर्स उस्ताद-ए-जमन कांफ्रेंस के साथ मुकम्मल हो गया। कुल की रस्म में लोगों ने शिरकत कर लोगों ने मन्नतों मुराद मांगी।
उर्स के आखरी दिन खानकाह-ए-तहसीनिया के पास चौक में उस्ताद-ए-जमन कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें मौलाना हसीब रजा खां ने कहा कि बुजुर्गों का दामन पकड़ने का असल मतलब यह है कि उनके बताए रास्ते पर चला जाए, दीन पर अमल किया जाए। अगर मुसलमान ऐसा करेंगे तो हमारे हालात जरूर सुधरेंगे। इस मौके पर मुफ्ती खुर्शीद, मौलाना जाहिद आदि मौजूद रहे।
दोपहर 12.30 बजे कुल शरीफ की फातेहा हुई। इसके बाद खानकाह-ए-तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खां ने दुआ की। आखिर में नईम तहसीनी ने आला हजरत का लिखा सलाम पढ़ा। इस मौके पर मौलाना नजीब रजा खां, रिजवान रजा खां, मुअज्जम रजा, मुकर्रम रजा आदि मौजूद रहे। संवाद