बरेली। बार-बार असफलता अक्सर लोगों को तोड़ देती है लेकिन यूपीएससी सिविल सेवा में चौथी रैंक हासिल करने वाले ऐश्वर्य वर्मा को तीन बार मिली असफलता ने और ज्यादा मेहनत करने का सबक दिया और चौथी बार में सफलता के मुकाम तक पहुंचा दिया। ऐश्वर्य कहते हैं कि सेल्फ स्टडी ने उन्हें कामयाबी दिलाने में सबसे ज्यादा भूमिका निभाई।
आईएएस बनने जा रहे ऐश्वर्य कहते हैं कि वह पहली बार में सिविल सेवा में उत्तीर्ण नहीं हो सके। दूसरी बार में सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा पास की। तीसरी बार में मेंस तक पहुंचे और चौथी बार में सफलता हासिल की। सफलता के रास्ते में तमाम रुकावटें आईं लेकिन परिवार सहयोग से हर बाधा दूर होती गई। ऐश्वर्य ने बताया कि 12वीं की पढ़ाई उन्होंने रुद्रपुर से की है। पिता बैंक में अधिकारी हैं, लिहाजा उनके तबादले होते रहे और उन्हें भी परिवार के साथ इधर से उधर शिफ्ट होना पड़ा। सिविल सेवा में जाना उनका मुख्य उद्देश्य था। इसे उन्होंने इन दिक्कतों से प्रभावित नहीं होने दिया।
एनसीईआरटी की किताबों से मिली मदद
ऐश्वर्य को लिखित परीक्षा में 1750 में से 860 और साक्षात्कार में 275 में से 179 अंक मिले हैं। वह कहते हैं कि पढ़ाई के लिए लक्ष्य तय करने जरूरी हैं। सिविल सेवा का पाठ्यक्रम बहुत लंबा है। हर दिन लक्ष्य लेकर पढ़ाई करें। चाहे चैप्टर पूरा करने में आठ घंटे लगें या फिर 16 घंटे। उन्होंने भी यही किया। शॉर्ट नोट्स भी बनाए थे। उनका विषय भूगोल था जिसके लिए उन्होंने एनसीईआरटी की पुस्तकों का बारीकी से अध्ययन किया।
मां मेरी रोल मॉडल
ऐश्वर्य कहते हैं कि कोरोना ने उन्हें प्रभावित जरूर किया लेकिन लॉकडाउन के दौरान घर में रहते हुए उसे उन्होंने अवसर में बदला। पढ़ाई के लिए पूरा समय मिला। तीन साल पहले दिल्ली के एक इंस्टीट्यूट से ऑनलाइन कोचिंग ली थी। उसके बाद खुद पढ़ाई की। भूगोल के बारे में अपने परिचित शिक्षकों से भी मदद ली। मां विनीता उनकी रोल मॉडल हैं। वह पहले शिक्षिका रही हैं, अब गृहणी हैं। उनकी बहन श्रेया रुहेलखंड विश्वविद्यालय से बीडीए की पढ़ाई कर रही हैं। बैंक अधिकारी पिता विवेक वर्मा और माता विनीता कहती हैं कि बेटे ने नाम रोशन किया है। उसका कठोर परिश्रम काम आया। उन्हें खेलने, पढ़ने व गाने सुनने का शौक है।
टिप्स : तैयारी के लिए विचारशील होने की जरूरत
सिविल सेवा में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ऐश्वर्य का सुझाव है कि पाठ्यक्रम की फिलॉसफी को समझने से आधी तैयारी पूरी हो जाती है। आईएएस बनने के लिए विचारशील होने की आवश्यकता होती है और समय प्रबंधन के साथ अनुशासन अनिवार्य है। जरूरी यह है कि सिविल सेवा के पाठ्यक्रम को अच्छी तरह समझ लिया जाए। संभव हो तो याद कर लिया जाए। वैकल्पिक विषयों को सोच-समझकर चुनें। अध्ययन सामग्री का चयन सही करें, जो पढ़ना है उस पर ध्यान दें। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं की पुस्तकें पढ़ें। जरूरत पड़ने पर इंटरनेट की मदद लें। तैयारी के लिए ऐसा टाइम टेबल बनाएं, जिसे फॉलो कर सकें। इसमें खेल आदि भी शामिल होना चाहिए। लगातार अध्ययन ठीक नहीं। कुछ समय शारीरिक अभ्यास के लिए निकालना जरूरी है। स्वस्थ रहेंगे तभी बेहतर पढ़ाई हो पाएगी। आंसर राइटिंग का अभ्यास भी करें। निबंध लेखन के लिए अच्छे शब्दों का प्रयोग करें।
साथियों के साथ ग्रुप डिस्कशन करें : ऐश्वर्य कहते हैं कि आईएएस की तैयारी के लिए जरूरी है कि जो पढ़ा है, उसे बोलने की आदत में डालें। तैयारी में जुटे दूसरे साथियों के साथ ग्रुप डिस्कशन करें। नई जानकारी हासिल करने के लिए समय-समय पर वरिष्ठों से बात करें।