बरेली के महेशपुर ठकुरान गांव में शनिवार को महाराणा प्रताप जयंती पर जुलूस निकलने से पहले विवाद खड़ा हो गया। दूसरी बिरादरी के लोगों ने जुलूस का विरोध किया। इससे तनाव की स्थिति बन गई। मामला थाने पहुंच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर मनमुटाव दूर किया।
बरेली में शनिवार शाम महेशपुर ठाकुरान गांव में महाराणा प्रताप जयंती पर शोभायात्रा जुलूस निकाला गया। इससे पहले सुबह के वक्त गांव निवासी दूसरी बिरादरी के लोगों ने जुलूस निकालने पर विरोध जताकर गांव और थाने के गेट पर हंगामा किया। पुलिस ने दोनों पक्ष के संभ्रांत लोगों को बैठाकर लिखित समझौता करवा दिया। इसके बाद शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई।
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गांव में हर साल की तरह शाम को जयंती शोभायात्रा प्रस्तावित थी। इससे पहले सुबह के वक्त हिंदू समुदाय के ही दूसरी बिरादरी के लोगों ने ऐलान कर दिया कि उनकी ओर होकर जुलूस निकाला गया तो वह विरोध करेंगे। कई महिलाएं जुलूस के रास्ते पर बैठ गईं। आयोजकों से तीखी नोंकझोंक के बाद कई महिला पुरुष थाने चले आए। थाने के गेट पर इन्होंने खासा हंगामा किया।
सूचना मिलते ही पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी यहां पहुंचे और समझाने की कोशिश की। महिलाएं पुलिस प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाने लगीं। महिलाओं का कहना था कि कुछ दिन पहले बाबा साहब की जयंती पर उनके जुलूस को पुलिस बुलाकर रुकवा दिया गया। इस बार हम महाराणा प्रताप शोभायात्रा नहीं निकलने देंगे। पुलिस से उनकी तीखी नोंकझोंक हुई।
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चुनावी खिचड़ी पका रहे खुराफातियों ने आग में डाला घी
इंस्पेक्टर सतीश कुमार ने पहले थाना गेट पर लोगों को समझाने का प्रयास किया। फिर उन्होंने दोनों पक्ष के चुनिंदा लोगों को थाने में बैठकर निस्तारण कराने का भरोसा दिया। थाने में लिखित समझौते के बाद शाम को शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। बताया जा रहा है कि गांव में प्रधानी के चुनाव की खिचड़ी अभी से पकने लगी है। ऐसे में कुछ खुराफाती तत्व दोनों पक्ष के लोगों को उकसाकर आग में घी डालने का काम कर रहे थे। इसी वजह से मामूली विवाद को तूल दे दिया गया।
महिलाएं बोलीं- हम सबका करते हैं सम्मान
विरोध कर रही महिलाओं का कहना था कि वह लोग सभी समाज के महापुरुषों का सम्मान करते हैं। महाराणा प्रताप भी सम्मानीय हैं लेकिन दूसरे समाज के लोगों ने आंबेडकर जयंती शोभायात्रा को पुराने रास्ते से नहीं निकलने दिया। जोगेंद्र सागर ने कहा कि उस समय पुलिस ने भी उन लोगों के साथ अन्याय किया था और हम सीमित इलाके में शोभायात्रा निकाल सके। उसी वक्त उन्होंने अधिकारियों से कह दिया था कि दूसरे समाज के जुलूस व शोभायात्रा को वह लोग भी नहीं निकलने देंगे।
थाने में दूर हुआ मनमुटाव
इंस्पेक्टर सुभाषनगर व प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में एक पक्ष के जोगेंद्र सागर, महेश सागर, सतीश सागर व सुमित भारती और दूसरे पक्ष के पूर्व प्रधान अश्विनी सिंह, कोटेदार अवनीश सिंह, संग्राम सिंह व भूपेंद्र सिंह आदि को साथ बैठाया गया। यहां आरोप प्रत्यारोप के बीच पता लगा कि दोनों ही समाज के महापुरुषों की शोभायात्रा पहले से निकलती आ रही है। कुछ जगह इसके रूट को लेकर विवाद की स्थिति है। तब दोनों पक्ष की सहमति से जुलूसों के रूट तय किए गए।
सौहार्दपूर्ण माहौल में निकली शोभायात्रा
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि शोभायात्रा जुलूस के रास्ते को लेकर महेशपुरा गांव में एक ही समुदाय के दो पक्षों के बीच मतभेद हो गया था। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया। थाने में दोनों पक्ष के लोगों ने सद्भावपूर्ण माहौल में बैठकर लिखित समझौता कर लिया। किसी तरह का अब कोई मनमुटाव नहीं है। शोभायात्रा का भी शाम सात बजे समापन हो गया है।