नड्डा की सूक्ष्म सांगठनिक रणनीति के दम पर ही भाजपा ने सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद बरेली, आंवला, पीलीभीत और शाहजहांपुर जैसी सीटों पर एकतरफा और बड़ी जीत दर्ज की हालांकि, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बरेली मंडल में पांच सीटों पर सपा ने जीत हासिल कर भाजपा के माथे पर बल ला दिया था। दो वर्ष बाद ही 2024 के लोकसभा चुनाव में आंवला लोकसभा सीट पर भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप को सपा उम्मीदवार नीरज मौर्य के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। वहीं, बदायूं सीट भी सपा के खाते में चली गई।
बरेली सीट पर 2019 में पूर्व केंद्रीय मंत्री व वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने 1.67 लाख से अधिक वोटों से प्रचंड जीत दर्ज की थी। 2024 में भाजपा उम्मीदवार छत्रपाल सिंह गंगवार की जीत का अंतर महज 34,804 वोट रह गया।
बरेली कॉलेज के राजनीति शास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. मनमीत कौर ने बताया कि जातीय बिखराव को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं को सक्रिय होना होगा। यह बात पार्टी आलाकमान भी समझ रहा है। यही कारण है कि समय-समय पर पदवात्रा, बूथ संवाद, रात्रि प्रवास जैसे कार्यक्रमों के जरिये सीधे संवाद पर जोर दिया जा रहा है। सफलता इस बात से तय होगी कि ये चौपालें केवल औपचारिक बैठक बनकर रह जाती हैं या सच में वोट में बदलती हैं।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय शाक्य ने बताया कि विपक्ष का चक्रव्यूह कागजों पर है, हमारा बूथ पर। भाजपा का कार्यकर्ता एसी कमरों में नहीं, गांव की चौपाल पर बैठकर योजना बनाता है। 2024 में आंवला और बदायूं में जो कमी रह गई, उसे हम बूथ स्तर पर पाटेंगे। विपक्ष के पास न नीति है, न नियत। मतदाता सूची पर सवाल उठाकर वह लोकतंत्र पर ही प्रश्नचिह्न लगाते हैं।