आंध्र प्रदेश सरकार अपनी जेलों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम करने के लिए यूपी का जेल मॉडल लागू करेगी। यूपी की तर्ज पर वहां अस्थायी जेल बनाई जाएंगी और ऐसी जेलों को कोविड एल-1 अस्पताल में तब्दील किया जाएगा जहां ज्यादा बंदी कोरोना संक्रमित होंगे। यूपी में झांसी, बस्ती, बलिया, नैनी, गोरखपुर और आगरा समेत 12 से अधिक जेलों में कोविड एल-1 अस्पताल बनाए गए हैं।
‘कोविड - 19 और जेल’ विषय पर नेशनल इंस्ट्रीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन चंडीगढ़ की ओर से आयोजित नेशनल वेबिनार में भी बुधवार को यूपी में अस्थायी जेल बनाने और ज्यादा संक्रमण वाली जेलों को कोविड एल-1 अस्पताल में तब्दील करने के कदम को सराहा गया। इस वेबिनार में यूपी के एडिशनल आईजी जेल और बरेली के जेल अधीक्षक समेत प्रदेश के पांच जेल अधिकारी शामिल थे।
वेबिनार में ज्यादातर राज्यों के जेल अधिकारियों ने क्षमता से अधिक बंदियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बैरकों में व्यवहारिक रूप से सामाजिक दूरी का पालन कराना मुमकिन नहीं है। इंस्टीट्यूट की ओर से आंकड़े रखे गए कि देश की 1350 जेलों में 4,78,600 बंदी हैं जबकि उनकी क्षमता सिर्फ 4,03793 बंदियों की ही है। इस तरह उनमें 18.5 फीसदी बंदी ज्यादा हैं।
यूपी में यह स्थिति और खराब है जहां कई जेलों में क्षमता से छह गुना तक बंदी हैं। विचाराधीन बंदियों की वजह से जेल ओवरलोड हैं। पूरे देश में ऐसे बंदियों की संख्या 3, 30,487 है, जिसे कोविड - 19 से निपटने के लिए कम करना जरूरी है।
जेलों में 24 घंटे मेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं होने, सामान्य दवाओं की अनुपलब्धता और सुरक्षा कारणों से डब्ल्यूएचओ का स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल लागू न कर पाने के मुद्दे भी उठे। जेल अधिकारियों ने कहा कि बंदियों और उनके संपर्क में आने वाले स्टाफ को मानसिक तनाव से दूर रखना भी बड़ी चुनौती है।
तय हुआ कि जेलों में कोविड के नजरिए से बंदियों की लगातार निगरानी की जाए, स्वास्थ्य विभाग व अन्य विभागों से बेहतर तालमेल बनाया जाए, विचाराधीन बंदियों की भीड़ को कम किया जाए। सभी जेलों में आइसोलेशन और क्वारंटीन ब्लॉक बनाने का भी सुझाव दिया गया। एडिशनल आईजी जेल डॉ. शरद कुलश्रेष्ठ ने बताया कि आंध्र प्रदेश ने यूपी की कई जेलों में कोविड एल- 1 अस्पताल बनाने और नए बंदियों को शुरू में स्थायी जेलों में रखने की व्यवस्था अपने यहां भी लागू करने की बात कही है।