सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने अपने विद्यालय में सुविधाएं न होने का हवाला देकर उसे परीक्षा केंद्र न बनाने के आग्रह के साथ डीएम को पत्र लिखकर दे दिया था। नेताजी के विद्यालय को परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर रखने की हिमाकत कैसे करते सो शिक्षा विभाग के अफसर उनके विद्यालय को परीक्षा केंद्र की सूची से हटाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
आंवला तहसील के त्रिकुनिया गांव स्थित वीरपाल सिंह का चौधरी प्रेमपाल सिंह इंटर कॉलेज बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाया गया था। वह इस विद्यालय के प्रबंधक हैं। केंद्र फाइनल होने के बाद उन्होंने डीएम को लिखकर दे दिया कि वह अपने विद्यालय को केंद्र नहीं बनाना चाहते हैं। डीएम ने उनका पत्र डीआईओएस को मार्क कर दिया। उसके बाद नियमानुसार प्रस्ताव बनकर जिला और मंडलीय कमेटी को जाने के बाद यह केंद्र काटा जा सकता था लेकिन अफसरों ने यह प्रक्रिया करने के बजाय कुछ नहीं किया। एक महीने बाद भी केंद्र न काटे जाने से यह तो तय हो गया है कि सपा जिलाध्यक्ष के विद्यालय में अब परीक्षा होगी लेकिन अंदरखाने ऐसी क्या खिचड़ी पकी कि वीरपाल सिंह चुप बैठ गए और अफसरों ने उनके अनुरोध पर कुछ नहीं किया। इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग में अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
अमूमन, किसी भी विद्यालय का प्रबंधन नहीं चाहता कि उनके यहां परीक्षा केंद्र नहीं बने। इसके उलट केंद्र बनाने के लिए मारामारी रहती है और खासतौर पर वित्तविहीन विद्यालय वाले केंद्र बनाने के लिए सिफारिशों से लेकर हर तरह से जुगाड़ लगाए रहते हैं। ऐसे में सपा जिलाध्यक्ष का अपने विद्यालय का केंद्र काटने का फैसला अप्रत्याशित था, इसलिए और ज्यादा क्योंकि उन्होंने केंद्र फाइनल होने के बाद यह मांग की। गौरतलब है कि केंद्र बनाने के लिए इस बार सत्ता पक्ष के नेताओं का अफसरों पर जबरदस्त दबाव था। अफसरों ने हद तक बात भी मानी लेकिन जिनकी नहीं मानी गई, वह नेता नाराज भी हुए। कई केंद्र बनाने की सिफारिशें कर रहे थे और कुछ दूसरे केंद्र कटवाने के लिए भी दबाव बनाना चाहते थे।
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वर्जन...
मैंने इसलिए अपने विद्यालय को सेंटर न बनाने को कहा था क्योंकि सेंटर वाले स्कूलों पर आरोप लगते हैं, लेकिन बाद में डीएम ने कहा कि आसपास और कोई विद्यालय नहीं है, जो सेंटर के लिए बेहतर रहेगा। हमारे यहां फर्नीचर भी पर्याप्त है इसलिए हमने उनका अनुरोध मान लिया।
-वीरपाल सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष