चेकिंग में प्रतिबंधित सामान लेकर पहुंचे छात्रों को मिली हिदायत, दुपट्टे भी बाहर उतरवा लिए गए
बरेली। यूपी बोर्ड परीक्षा का ‘महाकुंभ’ मंगलवार से शुरू हो गया। परीक्षा को सकुशल और नकलविहीन संपन्न कराने को लेकर कंट्रोल रूम से प्रत्येक केंद्र की निगरानी की जाती रही। केंद्र के अंदर सीसीटीवी और बाहर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के चलते परीक्षा को नकलविहीन बनाने में प्रशासन पूरी तौर से सफल रहा। दो पालियों में संपन्न हुई परीक्षा में कोई नकलची नहीं पकड़ा गया। परीक्षा में संस्कृत के प्रश्नों को हल करने और बी कॉपी पर जानकारियां भरने में परीक्षार्थियों का काफी समय बरबाद हुआ, जिससे कई छात्र पूरा प्रश्नपत्र हल करने से भी चूक गए।
पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहले दिन जिला कारागार समेत 132 केंद्रों पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के हिंदी विषय की परीक्षा हुई। सुबह आठ बजे से परीक्षा शुरू होनी थी, लेकिन सात बजे से ही छात्र केंद्रों पर पहुंचना शुरू हो गए थे। परीक्षार्थियों को ठंड में अधिक देर बाहर खड़े न होना पड़े, इसलिए उनकी सघन चेकिंग कर केंद्र में प्रवेश दे दिया गया। कई छात्र प्रतिबंध मोबाइल, बैग, डिजिटल घड़ी, जूते, मोजे पहनकर केंद्रों पर पहुंचे थे। प्रतिबंधित सभी सामान केंद्र के बाहर या उनके परिजनों को सौंप दिया गया। ऐसे में कई छात्रों को नंगे पांव ही परीक्षा देनी पड़ी। कई छात्र बिना ड्रेस के पहुंचे थे, उन्हें आगे की परीक्षाओं में ड्रेस में आने को कहा गया। परीक्षा के दौरान उन पर कंट्रोल रूम के जरिए सीसीटीवी से निगरानी रखी गई। परीक्षा से इतर किसी गतिविधि पर तत्काल कंट्रोल रूम से परीक्षा कक्ष में संपर्क कर हिदायत भी दी जाती रही।
बरेली इंटर कॉलेज केंद्र से परीक्षा देकर बाहर निकले हाईस्कूल के छात्र सुधांशु, सचिन, तौसीफ, सारोज और इंटर के इमरान, मनोज कुमार, अवधेश आदि ने बताया कि हिंदी के सवाल काफी आसान रहे, लेकिन संस्कृत के सवाल काफी कठिन थे। हालांकि, संस्कृत के सवाल कम थे, लेकिन इन पर समय अधिक लगने से कइयों के आते हुए सवाल भी छूट गए। फिर भी अच्छे अंकों से पास होने की उम्मीद बरकार है।
बी कॉपी मांगना पड़ गया भारी
छात्रों ने बताया कि अबकी बार बी कॉपी (उत्तरपुस्तिका) के प्रत्येक पन्ने पर ए कॉपी की तरह ही सारी जानकारियां भरनी थीं, लेकिन पहली कॉपी पर जानकारियां भरने के लिए शुरुआत के पांच मिनट मिलते हैं, लेकिन यह स्थिति बी कॉपी लेने के बाद नहीं रहती। इसलिए ए कॉपी पर ही सारे सवालों के जवाब लिखने वालों को राहत रही, जिन्होंने बी कॉपी मांगी उन्हें 15 मिनट का वक्त लगा, जिसके चलते सवाल छोड़ने पड़े या जल्दबाजी में उन्हें लिखना पड़ा इसलिए उसे सही ढंग से हल भी नहीं कर पाने का मलाल चेहरे पर झलकता रहा।
पर्चे और कॉपियों की रही कमी
परीक्षार्थियों ने बताया कि प्रश्नपत्र के कटे-फटे होने या उसमें प्रिंटिंग संबंधित कोई खामी होने पर बदलने के निर्देश थे। ऐसे में कइयों ने पेपर खोले तो यह खामियां देख उन्हें पर्चा बदलना पड़ा, जिसके चलते पेपर कम पड़ गए। कइयों को प्रिंटिंग की समस्या के बाद भी उसी पेपर से सवाल हर करने को विवश होना पड़ा। इसके अलावा ज्यादातर छात्रों ने बी कॉपियां भी लीं। कॉपियां भरपूर होने के बाद भी उन्हें लॉकर से निकालने और उसके वितरण आदि में भी देरी लगी। कई शिक्षक कॉपी की कमी बताकर दौड़ भाग से बचते रहे।
17 प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी
शासन, प्रशासन और डीआईओएस के सख्त निर्देश के बावजूद जिले में 17 कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने स्कूल के 58 शिक्षकों को रिलीव नहीं किया। लिहाजा, केंद्रों पर शिक्षकों की कमी हो गई। सुबह परीक्षा शुरू होने के काफी देर तक जब शिक्षक नहीं पहुंचे तो केंद्र व्यवस्थापकों ने तत्काल कंट्रोल रूम को सूचना दी। ऐसे में कक्ष निरीक्षकोें की तैनाती के बाबत अतिरिक्त कक्ष निरीक्षकों को ड्यूटी लगाई गई, देरी से सूचना मिलने की वजह से वह भी केंद्र पर देर से पहुंचे। इस मामले में डीआईओएस डॉ. अमरकांत सिंह ने सभी प्रधानाचार्यों को नोटिस देकर जवाब तलब किया है। साथ ही संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
गांव में रही कनेक्टिविटी की समस्या
आखिरकार जैसी संभावना जताई जा रही थी ठीक वैसे ही परीक्षा के दिन कई ग्रामीण इलाकों में बने केेंद्रों पर कनेक्टिविटी फेल हो गई। बताते हैं कि कंट्रोल रूम से कॉल कर वहां पर कनेक्टिविटी संबंधी जानकारी मांगी गई। साथ ही पास के अन्य केंद्रों पर भी स्थिति आंकी गई। हर जगह नेटवर्क समस्या होने से परीक्षा को नकलविहीन बनाने की मंशा पर सेंध लगते देख अफसरों ने अन्य रूटर, नेटवर्क या अन्य खामियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। साथ ही परीक्षा की शासन स्तर से रैंडमली मुआयना होेने के चलते पोल खुलने का डर भी अफसरों में रहा।
ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर पहुंची छात्रा
तेज बुखार, नजला, खांसी-जुकाम, चोट आदि से पीड़ित होने के बाद तमाम छात्र-छात्राएं पढ़ाई और परीक्षा देने से किनारा कर लेते हैं। वहीं, फे फड़ों की बीमारी से ग्रसित मोहल्ला शाहबाद निवासी हाईस्कूल की छात्रा साफिया जावेद ऑक्सीजन सिलिंडर साथ लेकर परीक्षा देने पहुंची। साफिया के पिता सरवर जावेद ने बताया कि बेटी की तबियत काफी दिनों से खराब चल रही है। उन्होंने और अन्य परिजनों ने उसे परीक्षा देने से मना कर दिया था, लेकिन साल भर तक डटकर पढ़ाई करने वाली सोफिया अपनी मेहनत को बरबाद नहीं करना चाहती थी। उसकी जिद के आगे वह भी हार गए। डॉक्टरों से बात की तो वह भी हैरत में पड़ गए। पहले तो मना कर दिया ,लेकिन जब पेरेंट्स नहीं माने तो उन्होंने ऑक्सीजन सिलिंडर साथ ले जाने का सुझाव दिया। लिहाजा, मंगलवार को जीजीआईसी में बने केंद्र पर पेरेंट्स के साथ साफिया ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर पहुंची। उसके ड्रिप आदि भी लगे हुए थे। छात्रा ने बताया कि परीक्षा अच्छे से गई और संस्कृत के सवाल भी उसने आसानी से हल कर लिए।
श्यामगंज में लगा भीषण जाम
सीवर लाइन डालने के लिए सड़क के एक भाग में हुई खुदाई के चलते सड़क संकरी हो गई है। ऐसे में आजाद इंटर कॉलेज, श्यामगंज में सुबह 11 बजे और शाम पांच बजे परीक्षा खत्म होने के बाद काफी तादाद में छात्र बाहर निकले तो वहां पर भीषण जाम लग गया। परीक्षार्थियों को लेने पहुंचे उनके परिजनों, दुकानदारों, खरीदारों, राहगीरों, ढेले, खोमचे वालों के वाहन भी सड़कों पर खड़े रहे। घंटे भर तक की कड़ी मशक्कत के बाद जाम कुछ हल्का हुआ। बता दें कि कई स्कूलों के पास पार्किंग नहीं है। इसलिए परीक्षा देने पहुंचे छात्र या उनके परिजनों के वाहन सड़कों पर जाम की वजह बन रहे हैं।
4159 ने छोड़ी परीक्षा
सुबह की पाली में 51054 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, इसमें 46895 उपस्थित और 4159 अनुपस्थित (3016 बालक और 1143 बालिका) रहे।
व्यवस्था तार-तार: कॉपियां कंधे पर
उठाकर संकलन केंद्र लाई गईं
बरेली। परीक्षा तो सकुशल संपन्न हुई, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं को कड़ी सुरक्षा के बीच जीआईसी संकलन केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था तार-तार हो गई। तमाम केंद्रों के कर्मचारी और शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं को बाइक, रिक्शा, ऑटो व अन्य साधनों के जरिए केंद्र तक पहुंचाते दिखाई दिए। इस दौरान पुलिसकर्मी नदारद रहे।
शासनादेश के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को कड़ी सुरक्षा घेरे के बीच संकलन केंद्र तक पहुंचाया जाना चाहिए था। इस संबंध में पिछले दिनों केंद्र व्यवस्थापकों की बैठक में एसएसपी, एसपी सिटी, एसपी रूरल आदि ने परीक्षा के शुरू से आखिर तक व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने का बढ़ चढ़कर दावा किया था, जिसकी हकीकत परीक्षा खत्म होने के बाद ही दिखाई दी। मामले पर डीआईओएस डॉ. अमरकांत सिंह ने उत्तर पुस्तिकाओं को बगैर सुरक्षा घेरे के संकलन केंद्र तक पहुंचाने पर नाराजगी जताई। साथ ही पुलिस की व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाते हुए मामले को उच्चाधिकारियों से अवगत कराने को कहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को ही यह व्यवस्था संभालनी थी। अगर, ऐसा नहीं है तो संबंधित केंद्रों पर लगे पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को कार्रवाई की जानी चाहिए। बताया कि भमौरा के संकलन केंद्र पर ऐसा ही मामला संज्ञान में आने के बाद तत्काल उन्होंने एसपी रूरल को सूचना दी। इसके बाद वहां व्यवस्था सुधरी। ब्यूरो
इस बात के निर्देश पहले से ही हैं कि उत्तर पुस्तिकाएं पुलिस की मौजूदगी में परीक्षा केंद्र से संकलन केंद्र तक पहुंचाई जाएंगी। मंगलवार को पहले दिन किसी केंद्र से इस तरह की शिकायत नहीं आई कि पुलिस ने सहयोग नहीं दिया हो। बुधवार को इस पर और नजर रखी जाएगी। स्टाफ का दोष मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
- रवींद्र कुमार, एसपी सिटी