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रुहेलखंड विश्वविद्यालय कार्य परिषद ने फिर पलटा पूर्व रजिस्ट्रार का फैसला

Fri, 19 Dec 2014 10:34 PM IST
बरेली
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने पूर्व रजिस्ट्रार के एक और फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय में कोई सीनेट नहीं है। इस कारण रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डॉ. केशव अग्रवाल को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) का सदस्य निर्वाचित नहीं किया गया है। सदस्यों ने प्रस्ताव पारित किया है कि निर्वाचन की भ्रांतियों को दूर करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन स्वास्थ्य मंत्रालय और एमसीआई को पत्र लिखे। इसमें स्पष्ट किया जाए कि डॉ. केशव अग्रवाल को एमसीआई का सदस्य नहीं निर्वाचित किया है और न ही रुहेलखंड विश्वविद्यालय नाम का कोई मेडिकल कॉलेज है। इस मामले की जांच के लिए कमेटी भी बनी है।
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  कार्य परिषद की बैठक शुक्रवार को कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन की अध्यक्षता में हुई। परिषद ने तय किया कि स्प्रिंगडेल कॉलेज को संबद्धता समाप्त किए जाने का नोटिस दिया जाएगा। स्प्रिंगडेल कॉलेज में बीएड के एससी छात्र देवेंद्र कन्नौजिया को फीस लेने के बाद भी 2013-14 की परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था। शिकायत राजभवन तक पहुंचने के बाद जांच कमेटी बनाई गई थी। जांच कमेटी ने कॉलेज को दोषी पाया है। कार्यपरिषद ने यह भी निर्णय लिया कि नोटिस देने के साथ ही कॉलेज को 2014-15 में छात्र को परीक्षा भी दिलानी होगी। नोटिस का जवाब अगली कार्यपरिषद की बैठक में रखा जाएगा। बैठक में रजिस्ट्रार एके सिंह, प्रो. एके सिन्हा, प्रो. एनपी सिंह, डॉ. अभय सिंह, डॉ. श्याम बिहारी लाल, डॉ. विजय बहादुर यादव, डॉ. केके चौधरी, डॉ. आईपी वर्मा, डॉ. योगेश गुप्ता, डॉ. वीपी सिंह, डॉ. सुधीर वर्मा आदि सदस्य मौजूद रहे।  

प्रति कुलपति बनाने का प्रस्ताव भी पास
विश्वविद्यालय में अब तक प्रति कुलपति का कोई पद नहीं था। अब प्रति कुलपति भी नियुक्त किया जाएगा। यह पद सीनियर प्रोफेसर को दिया जाएगा। इस पद के लिए प्रो. वीपी सिंह का नाम लगभग तय है। कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय के लॉ विभाग की डॉ. शेफाली यादव का इस्तीफा भी स्वीकार नहीं किया है। शेफाली यादव कई महीने पहले शकुंतला देवी विश्वविद्यालय लखनऊ में ज्वॉइन कर चुकी हैं। इसके बाद भी विश्वविद्यालय की ओर से उनके अकाउंट में दो महीने की सेलरी भेज दी गई है। सेलरी वापस होने के बाद अगली बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा।
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वित्त अधिकारी के खिलाफ उठी आवाज
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में वित्त अधिकारी के खिलाफ आवाज उठी। उनकी कार्यशैली पर सदस्यों ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर वित्त अधिकारी विश्वविद्यालय आ ही नहीं रहे हैं तो रजिस्ट्रार को वित्त का चार्ज दिया जाए। हालांकि, रजिस्ट्रार ने यह चार्ज लेने से मना कर दिया।
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इन मामलों पर चर्चा
-17 शोधर्थियों की पीएचडी स्वीकार कर ली हैं।
-विश्वविद्यालय में छात्रावासों के नामकरण का प्रस्ताव भी रखा गया। तय किया गया कि कार्य परिषद के सदस्यों से नाम के लिए सुझाव मांगा जाएगा।
-सदस्यों ने सिफारिश की कि एमबीए के मेडल को लेकर चल रहे विवाद को भी जांच कमेटी जल्द सुलझाए।
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इन पर नहीं हुआ निर्णय
-मानदेय कर्मचारियों के समायोजन के मामले पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। शासनादेश के मुताबिक इससे संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
-राजभवन में विचाराधीन होने के कारण लॉ विभाग के डॉ. नवीन चौबे के स्थायित्व के मामले पर भी कोई निर्णय नहीं हो सका।
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