एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आला हजरत और पंडित राधे श्याम कथावाचक के नाम से शोध पीठ स्थापित हुए दो वर्षों से ज्यादा समय हो गया। हालांकि दोनों शोध पीठ का कैंपस में सिर्फ बोर्ड ही लगा है। बजट का रोना रोकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों चेयर पर कोई कार्य नहीं कराया। रिसर्च होना तो दूर की बात, दोनों शख्सियत से जुड़ी कोई किताब भी यहां नहीं मिलेगी । अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय चेयर के लिए यूजीसी ने ग्रांट देने को हाथ बढ़ाये तो विश्वविद्यालय ने हाथ पीछे खींच लिए। चेयर स्थापित करने के लिए यूजीसी को प्रस्ताव तो भेजा, लेकिन यूजीसी चेयरमैन की बैठक में विश्वविद्यालय का कोई भी प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। इस बजह से विश्वविद्यालय का पंडित दीन दयाल उपाध्याय चेयर का प्रस्ताव स्वीकार नहीं हो सका। यूजीसी ने प्रस्ताव भेजने वाले विश्वविद्यालयों की सूची भी जारी कर दी है।
कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल का कहना है कि बैठक में भले ही कोई न जा पाया हो, लेकिन पंडित दीन दयाल उपाध्याय चेयर स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। यूजीसी को प्रस्ताव भेजा है। यूजीसी से बात की जाएगी।
19 प्रस्ताव और 15 विवि ने लिया हिस्सा
पंडित दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ के लिए यूजीसी को 18 विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव मिले। इसमें रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने भी प्रस्ताव भेजा था। बरेली के अलावा बीबीए यूनिवर्सिटी लखनऊ, भगत फूल सिंह यूनिवर्सिटी सोनीपत, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश, जम्मू यूनिवर्सिटी समेत 18 विश्वविद्यालयों ने प्रस्ताव भेजे थे। यूजीसी की बैठक में पंद्रह विश्वविद्यालय ही शामिल हुए। स्वामी दयानंद सरस्वती चेयर के लिए नौ प्रस्ताव थे जिसमें आठ विश्वविद्यालयों ने हिस्सा लिया।