फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूनिवर्सिटी करे समस्या का समाधान

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में रेग्युलेशन एक्ट-2009 की वजह से बीच में फंसे पीएचडी करने वालों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष ने राहत दी है। यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि अगर विश्वविद्यालय की गड़बड़ी है तो उसे ठीक करें। यूजीसी रेग्युलेशन एक्ट-2009 के बाद विश्वविद्यालय ने जिन अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन पुराने नियमों के तहत लिया है, उनकी समस्या विश्वविद्यालय को ही हल करनी पड़ेगी। चाहे वह 11 प्वाइंट देकर  करें या फिर कोई और रास्ता निकालें।
विज्ञापन

रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के बाद गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यूजीसी के अध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया। कैंपस में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के संबंध में प्रो. प्रकाश ने कहा कि विश्वविद्यालयों को गाइडलाइन जारी की जा चुकी हैं। हर हाल में कैंपस को सुरक्षित बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समान पाठ्यक्रम व्यवस्था को विश्वविद्यालयों को सख्ती से लागू करना होगा। इससे उच्च शिक्षा का स्तर सुधरेगा। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बंद की गई नॉन-नेट फेलोशिप दोबारा शुरू करने के मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। पांच सालों से रिसर्च बंद तो शिक्षकों के प्रमोशन में एपीआई मार्किंग कैसे होगी, इस सवाल को भी वह टाल गए। बोले, इसमें शिक्षकों का कोई मामला ही नहीं है।

पीएचडी कर चुके अभ्यर्थियों की समस्या
यूजीसी रेग्युलेशन एक्ट-2009 उसी वर्ष 11 जुलाई से प्रभावी हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय को पीएचडी के रजिस्ट्रेशन बंद कर देने चाहिए थे लेकिन, सितंबर तक रजिस्ट्रेशन जारी रहा। पुराने नियमों के तहत पीएचडी कराई गई। अब पीएचडी कर के अभ्यर्थी जहां भी जा रहे हैं उनकी डिग्री को अमान्य कर दिया जा रहा है। उनका नेट करना भी अनिवार्य है। इस समस्या के बारे में कई बार यूजीसी को पीएचडी धारकों ने लिखा लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। अब यूजीसी चेयरमैन ने साफ किया है कि इसका हल विश्वविद्यालयों को ही निकालना होगा। उन्हें मानकों के 11 बिंदु पालन करने वाला सर्टिफिकेट देना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें