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एनआईआरएफ रैंकिंग के लिए दावेदारी की तैयारी में जुटा विश्वविद्यालय

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MJP Rohilkhand university
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कार्यकारिणी की बैठक में कुलपति प्रो. केपी सिंह ने दी जानकारी
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शिक्षक कल्याण कोष के लिए जारी नई नियमावली का कार्य परिषद ने किया अनुमोदन

बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) रैंकिंग के लिए आवेदन की कवायद शुरू हो गई है। सोमवार को विश्वविद्यालय कार्यकारिणी की बैठक में कुलपति प्रो. केपी सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने रैंकिंग में शामिल होने पर विश्वविद्यालय की विदेशों में भी पहचान बढ़ने की उम्मीद जताई है। बैठक में कई अन्य प्रस्तावों का अनुमोदन हुआ।
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कुलपति कार्यालय स्थित समिति कक्ष में कार्यकारिणी की बैठक में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही माध्यम से सदस्यों ने प्रतिभाग किया। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने नवगठित सभी सेलों, निदेशालय और इकाइयों की कार्यप्रणाली और संचालन की जानकारी दी। विश्वविद्यालय द्वारा जल्द ही एनआईआरएफ रैंकिंग के लिए आवेदन करने की बात कही। सभी सदस्यों ने कुलपति के इस प्रयास को सराहा। बैठक में शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में जारी आदेश और शासनादेश लागू करने पर मंथन किया गया। कार्य परिषद ने प्रस्ताव को अनुमोदित कर लागू करने का निर्णय लिया है।

एनआईआरएफ के क्या हैं मानक

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने 29 सितंबर 2015 को एनआईआरएफ रैंकिंग की शुरुआत की। हर क्षेत्र के भारतीय शैक्षणिक संस्थानों को उनकी उत्कृष्टता के आधार पर नेशनल रैंक दी जाती है। इसमें टीचिंग, लर्निंग एंड रिसोर्स, रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस, ग्रेजुएशन आउटकम, आउटरीच एंड इन्क्लूसिविटी, परसेप्शन के आधार पर संस्थानों को अंक मिलतेे हैं।

इन संस्थानों का होता है मूल्यांकन

एनआईआरएफ रैंकिंग डेंटल, यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी कॉलेज, मेडिकल, लॉ, आर्किटेक्चर आदि संस्थानों की तैयार होती है। रैंकिंग के दौरान एनआईआरएफ संस्थानों की अवधारणा, अनुसंधान एवं व्यावसायिक प्रक्रिया, अवर स्नातक परिणाम, पहुंच एवं समावेशिता, शिक्षण-अधिगम संसाधन आदि का आकलन कर सूची जारी करता है।

शिक्षक की असमय मृत्यु पर परिजन को मिलेगी ढाई लाख की मदद

बैठक में विश्वविद्यालय के शिक्षक कल्याण कोष के लिए नई नियमावली का कार्य परिषद ने अनुमोदन किया। इसके तहत विश्वविद्यालय परिसर या कॉलेज के किसी पूर्णकालिक शिक्षक की असमय मृत्यु पर शिक्षक कल्याण कोष से उसके परिजन को एकमुश्त 2.5 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी। कोई शिक्षक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार या कॉन्फ्रेंस में शामिल होता है तो उसे 25000 रुपये तक की सहायता मिलेगी। कुलपति ने शिक्षक कल्याण के लिए कोष का प्रयोग करने को कहा। नियमावली के तहत विश्वविद्यालय परिसर, राजकीय कॉलेजों, वित्तीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों समेत स्ववित्तपोषित कॉलेजों में दस साल तक शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों को भी समाहित करने को कहा। कार्य परिषद ने कुलाधिपति के आदेशानुसार शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में प्रदत्त आदेशों/शासनादेश को लागू करने का फैसला किया।

बैठक में ये ऑनलाइन रहे मौजूद

कुलाधिपति (राज्यपाल) के प्रतिनिधि डॉ. बीपी द्विवेदी, डॉ. आरएस पुंडीर, डॉ. रामगोपाल, कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार, वित्त अधिकारी केके शंखवार, डॉ. बीयू भरतरिया, डॉ. जेएन मौर्य, डॉ. विनय ऋषिवाल, डॉ. एमके सिंह, डॉ. केके चौधरी, डॉ. प्रवीण तिवारी, डॉ. रश्मि रंजन, डॉ. गौरव राव, डॉ. सीएम जैन, डॉ. प्रभा शर्मा, डॉ. चंद्रकांता सिंघल, मयंक अग्रवाल, सुधाकर मौर्य, तपन वर्मा आदि।
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