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UP Nikay Chunav: संघ में मजबूत पकड़ व राजनीतिक सक्रियता से उमेश गौतम को मिला भाजपा का टिकट

Mon, 24 Apr 2023 03:49 PM IST
मुकेश कुमार राहुल दुबे, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

भाजपा से 35 दावेदारों ने टिकट के लिए आवेदन किया था। पिछले सप्ताह निकाय चुनाव प्रभारी, सांसद व विधायकों की मैराथन बैठक में तीन नाम संगठन को भेजे गए थे। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हुए मंथन में उमेश गौतम बाजी मार ले गए।
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भाजपा प्रत्याशी उमेश गौतम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के निवर्तमान मेयर उमेश गौतम एक बार फिर भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। वह 2017 में भाजपा के टिकट पर ही मेयर बने थे। भाजपा से 35 दावेदारों ने टिकट के लिए आवेदन किया था। पिछले सप्ताह निकाय चुनाव प्रभारी, सांसद व विधायकों की मैराथन बैठक में तीन नाम संगठन को भेजे गए थे। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हुए मंथन में उमेश गौतम बाजी मार ले गए। सूत्रों की माने तो पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उनकी मुखालफत भी की थी, मगर संघ में मजबूत पकड़ और राजनीतिक सक्रियता ने उन्हें एक बार फिर मैदान में ला खड़ा किया।

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2017 के नगर निकाय चुनाव में जीत हासिल करने वाले उमेश गौतम ने भी इस बार मेयर सीट पर आवेदन किया था। उनके अलावा भाजपा नेता अनुपम कपूर, गुलशन आनंद, डॉ. विनोद पागरानी व महानगर अध्यक्ष केएम अरोड़ा समेत अन्य नेताओं ने भी दावेदारी ठोकी थी। पिछले सप्ताह हुई कोर कमेटी की बैठक के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म होना शुरू हुआ तो यह भी चर्चा हुई कि पार्टी के कुछ बड़े नेता अंदरखाने उनका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में इस बार पार्टी नए चेहरे पर दांव खेल सकती है। 

दिल्ली में तय हुआ नाम 

बरेली आए चुनाव प्रभारी जयवीर सिंह बैठक में तय हुए तीन नाम लेकर लखनऊ पहुंचे गए। इधर करीब एक दर्जन से अधिक प्रत्याशियों ने भी लखनऊ में डेरा डाल दिया। दो दिन तक चली बैठक के बाद लखनऊ में नाम तय नहीं हो सके। अंत में तीनों नामों का पैनल दिल्ली भेज दिया गया। दिल्ली में हुई कोर कमेटी की बैठक में दो नाम फाइनल किए गए, इसमें उमेश गौतम का नाम भी रहा। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में हुई बैठक में संघ पदाधिकारियों से भी सलाह मशविरा किया गया। संघ की पहली पसंद उमेश गौतम रहे। 

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संघ के फीडबैक के आधार पर उमेश गौतम के हो रहे विरोध को दरकिनार कर दिया गया। यहीं से उमेश गौतम ने सभी को पीछे छोड़कर रेस में अपना नाम सबसे आगे कर लिया। इसके बाद उमेश गौतम का नाम लखनऊ भेज दिया गया। दिल्ली से अंतिम मुहर लगने के बाद राजनीतिक सक्रियता की मुहर लखनऊ के भाजपा नेताओं ने लगा दी। रविवार को उनके नाम की घोषणा कर दी गई। बताया जा रहा है कि उनकी राजनीतिक सक्रियता पर सकारात्मक मुहर सीएम ने भी लगाई।

उमेश गौतम के नाम पर 2017 में नाराज हुआ था एक गुट

2017 में जब भाजपा ने उमेश गौतम को प्रत्याशी बनाया था तो भाजपा का एक गुट नाराज हुआ था और विरोध भी हुआ था। दावे भी हुए थे कि पार्टी टिकट में बदलाव कर सकती है, मगर पार्टी अपने फैसले पर अडिग रही। उमेश गौतम ने अपने प्रतिद्वंदी सपा प्रत्याशी डॉ. आईएस तोमर को करीब 12 हजार वोटों से मात दी थी। नगर निगम के 32 साल के इतिहास में भाजपा को तीन, सपा को दो और कांग्रेस को एक बार जीत हासिल हुई है।

कुछ बड़े फैसलों ने निखारी छवि

मेयर बनने के बाद उमेश गौतम ने श्यामगंज से ईंट पजाया होते हुए संजय नगर तक सड़क चौड़ीकरण का फैसला लिया। इस पर नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि ईंट पजाया तक अतिक्रमण नहीं हट सकेेगा। तमाम विरोध का सामना करना होगा। इसके बावजूद उन्होंने खुद टीम के साथ रहकर अतिक्रमण हटवाना शुरू किया और उस सड़क का चौड़ीकरण शुरू कराया। शुरुआती समय में शहर में झुमका लाइटें लगाकर प्रमुख सड़कें चमकाईं तो डीडीपुरम के शील चौराहे तक आदर्श सड़क के रूप में उसे तैयार किया। इसके अलावा डेलापीर और अक्षर विहार तालाब से कई साल पुराने कब्जों को हटवाकर उनका सुंदरीकरण कराया। स्मार्ट सिटी के तहत हुए कामों का भी उन्हें फायदा मिला।
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