शिक्षण संस्थानों के अंदर और बाहर छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा कई बार उठ चुका है। यूजीसी इस बाबत निर्देश भी जारी कर चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेज इस अहम मुद्दे पर संजीदा नहीं हुए। लापरवाही के चलते कई विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ बड़े हादसे भी हो चुके हैं। अब यूजीसी ने विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में स्टूडेंट्स काउंसलिंग सिस्टम बनाने के निर्देश जारी किए हैं ताकि कैंपस के बाहर भी छात्र सुरक्षित हो सकें। इसके लिए विश्वविद्यालय और कॉलेजों में स्टूडेंट काउंसलिंग सेंटर बनाए जाएंगे। अगर छात्र किसी वजह से अवसाद ग्रस्त हो गया या बाहर गलत संगत में फंस गया तो उसको सही राह पर लाया जा सके।
छात्र और संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर
स्टूडेंट काउंसलिंग सेंटर से शिक्षक, छात्र, अभिभावक, हॉस्टल वार्डन को जोड़ा जाएगा। छात्र से जुड़ी सारी जानकारी साझा की जाएगी। अगर छात्र किसी भी तरह से परेशान हैं, अवसाद ग्रस्त हैं, पढ़ाई में मन नहीं लगता, कैंपस के बाहर गलत संगत में पड़ गया तो उसकी काउंसलिंग की जाएगी। कैंपस के बाहर वह किन एक्टिविटी में रहता है उसको वॉच किया जाएगा। कॅरियर के लिए उनको सही रास्ता दिखाया जाएगा। अगर छात्रों का कोई ग्रुप बाहर जाता है तो उसपर भी नजर रखी जाएगी। एकेडमिक रिकार्ड और छात्र के व्यवहार को भी नियमित अंतराल पर नोटिस किया जाएगा ताकि कुछ भी गड़बड़ होने पर उसे दुरुस्त किया जा सके।
हमारे छात्र हित सर्वोपरि है। स्टूडेंट्स काउंसलिंग सेंटर शुरू करने के लिए यूजीसी ने पहल की है। इसपर हम गंभीरता से कार्य करेंगे। -प्रोफेसर अनिल शुक्ल, कुलपति