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UP: डिजिटल अरेस्ट करने वाले गिरोह के दो और ठग गिरफ्तार, रिटायर्ड वैज्ञानिक से वसूले थे 1.29 करोड़ रुपये

Fri, 11 Jul 2025 04:40 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली में रिटायर्ड वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों मिर्जापुर जनपद के रहने वाले हैं। 
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साइबर ठगी के आरोपी - फोटो : पुलिस विभाग
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विस्तार
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बरेली में आईवीआरआई के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस को दूसरी सफलता मिल गई है। टीम ने मिर्जापुर में दबिश देकर छात्र दीपू पांडेय और बैग फैक्टरी के कर्मचारी शुभम यादव को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को सीजेएम कोर्ट से जेल भेजा गया है।

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17 जून को आईवीआरआई के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक शुकदेव नंदी को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट किया था। ठगों ने खुद को बंगलूरू पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताकर वैज्ञानिक के नाम वाले फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल मानव तस्करी में इस्तेमाल करने का डर दिखाया। 

क्रिप्टो करेंसी में बदली रकम 
ठगों ने डर दिखाकर उनसे 1.29 करोड़ रुपये तीन खातों में ट्रांसफर करा लिए। यह रकम बाद में 125 खातों में ट्रांसफर कर क्रिप्टो करेंसी में बदल दी गई। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्य लखनऊ से पकड़े थे। अब साइबर थाना प्रभारी दिनेश शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मिर्जापुर के थाना जमालपुर निवासी दीपू पांडेय और शुभम यादव को गिरफ्तार कर लिया। 
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दोनों से एक आईफोन, तीन डेबिट कार्ड और एक मोबाइल बरामद किया गया है। रकम बरामदगी को लेकर साइबर टीम काम तो कर रही है, लेकिन जानकार बताते हैं कि क्रिप्टो करेंसी में बदलने के बाद रकम वापसी मुश्किल से हो पाती है। 

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संगठित अपराध के तहत हो रही कार्रवाई
पुलिस ने अब तक गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। माना जा रहा है कि गिरफ्तार होने वाले ठगों की संख्या बढ़ सकती है। ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह पर लगाम लगाने के लिए पुलिस का रवैया सख्त है। एसएसपी अनुराग आर्य ने पहले गिरफ्तार हुए चार आरोपियों पर संगठित अपराध करने की धारा 111 अलग से लगवा दी थी। पुलिस गिरोह के सदस्यों का पंजीकरण कर सकती है। इसके बाद इनकी संपत्ति चिह्नित कर जब्त की जा सकती है।

दीपू ने किराये पर दिया था शुभम का खाता 
गिरोह के सदस्य कमीशन पर लोगों का खाता लेकर उसमें ठगी की रकम ट्रांसफर कराते हैं, उसमें से रकम अन्य खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं। साइबर थाना प्रभारी ने बताया कि लखनऊ के एक खाते में ठगी की सर्वाधिक रकम 1.10 करोड़ गई थी। उस खाते से एक खाते में तीन लाख रुपये भेजे गए थे। जांच में वह खाता मिर्जापुर की एक जंबो बैग फैक्टरी में काम करने वाले शुभम का मिला। 

शुभम की गिरफ्तारी के बाद पता लगा कि उसके दोस्त दीपू ने शुभम के नाम से खाता खुलवाकर उसका डेबिट कार्ड, चेकबुक राजस्थान के एक व्यक्ति को दे दिया था। तीन लाख की रकम उसी व्यक्ति ने उसी दिन निकालकर क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भिजवा दी। उसने कमीशन के तौर पर दीपू को 13 हजार रुपये भेजे थे, दीपू ने इनमें से दस हजार रोककर तीन हजार खाते के मालिक शुभम को दे दिए। 

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