मुकेश और राजू की बुजुर्ग मां जयदेवी ने बताया कि पांच साल पहले उनका परिवार बरेली के संजय नगर से आंवला आकर बस गया था। कोरोना की पहली लहर में उनके पति प्रेमशंकर की मौत हो गई थी । पांच बेटों में यह दोनों छोटे और अविवाहित थे।
मां के साथ रहते थे दोनों भाई
तीन बड़े भाई अपने परिवार के साथ रहते हैं। जबकि यह दोनों भाई अपनी मां के साथ रहते थे। ई-रिक्शा चलाकर व मेहनत मजदूरी करके भरण पोषण करते थे। रविवार को सभी खुशी-खुशी पूर्णागिरि दर्शन के लिए ट्रेन से गए थे। सोमवार को जैसे ही उनके डूबने की सूचना मिली तो परिवार में कोहराम मच गया।