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Bareilly News: फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले दो भाई गिरफ्तार, 26 प्रमाण पत्र, दो लैपटॉप बरामद

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बरेली। एसटीएफ ने फर्जी वेबसाइट, पोर्टल और सॉफ्टवेयर के जरिये अंतरराज्यीय स्तर पर फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में दो सगे भाइयों को गिरफ्तार करते हुए 26 जन्म, चार मृत्यु प्रमाण पत्र, दो लैपटॉप, एक आधार कार्ड, एटीएम कार्ड और दो हजार रुपये बरामद किए गए। दोनों के खिलाफ भमोरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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एसटीएफ को काफी समय से फर्जी वेबसाइट, पोर्टल और सॉफ्टवेयर के जरिये फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने और इनका विभिन्न सरकारी योजनाओं के साथ पासपोर्ट, बैनामा, वसियतनामा आदि में इस्तेमाल की सूचना मिल रही थीं। डीएसपी एसटीएफ प्रमेश शुक्ला ने इस संबंध में सूचनाएं जुटाने के लिए कई टीमों को लगाया था। एसटीएफ अयोध्या की टीम को बरेली के थाना भमोरा के कस्बा देवचरा से तार जुड़े होने की पुख्ता सूचनाएं मिलीं। मंगलवार को एसआई सौरभ मिश्रा के नेतृत्व में अयोध्या से एसटीएफ की टीम बरेली पहुंची। यहां एसटीएफ की स्थानीय फील्ड यूनिट और भमोरा पुलिस के सहयोग से मंगलवार शाम सात बजे देवचरा में दिलजीत इंटरनेट कैफे पर छापा मारा।
एसटीएफ ने सगे भाई रवि सिंह और देव सिंह को हिरासत में लेने के साथ दो लैपटॉप कब्जे में ले लिए। कैफे से 26 जन्म, चार मृत्यु प्रमाण पत्र भी मिले। छानबीन की तो पता लगा कि यह फर्जी हैं। लैपटॉप में कई फर्जी वेबसाइट और पोर्टल के लिंक भी मिले। यह सरकारी वेबसाइटों से मिलते जुलते थे। इंस्पेक्टर भमोरा आरके शर्मा ने बताया कि दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। संवाद
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तीन साल में फर्जीवाड़ा कर कमाए 28.10 लाख
एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जीवाड़ा कर जाली मृत्यु और जन्म प्रमाण पत्र बनाकर दोनों भाइयों ने 28.10 लाख रुपये कमाए हैं। फर्जी पोर्टल से जो बैंक अकाउंट लिंक पाया गया है उसमें तीन साल के दौरान यह रकम क्रेडिट हुई है। अनुमान जताया जा रहा है कि यह धंधा काफी समय से चल रहा था। इस दौरान हजारों की संख्या में फर्जी मृत्यु और जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं।


इंटर कॉलेज में इतिहास का शिक्षक है देव सिंह
भाई के साथ फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का रैकेट चलाने वाला देव सिंह राम भरोसे इंटर कॉलेज में इतिहास का शिक्षक है। दोनों भाई मिलकर अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए यह काम कर रहे थे। कस्बे में भी उन्होंने तमाम लोगों के लिए जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए हैं। आवेदन फर्जी पोर्टल https://dc.crsorgi.gov.in.indesx.cloud/register.php पर कराया जाता था। पोर्टल पर ही रकम जमा होती थी और पोर्टल से ही प्रमाण पत्र डाउनलोड हो जाता था। ऐसे में किसी को शक भी नहीं होता था।




इस तरफ करते थे फर्जीवाड़ा

पूछताछ में दोनों भाइयों ने बताया कि वह लोग फेसबुक के जरिये पोर्टल बनाने वालों से संपर्क करते हैं। इसके बाद फर्जी पोर्टल बनवाते और फेसबुक के जरिये ही विभिन्न ग्रुप में जुड़कर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के विज्ञापन में अपना मोबाइल नंबर प्रदर्शित करते हैं। इच्छुक लोग व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क करते तो उन लोगों को अपने फर्जी पोर्टल का लिंक दे देते थे। लिंक को खोलने पर रजिस्ट्रेशन के लिए मोबाइल नंबर मांगा जाता है। अगले पेज पर रिचार्ज वॉलेट ऑप्शन जाने पर एक क्यू आर कोड प्रदर्शित होता है। इसे स्कैन करने पर संबंधित के 200 रुपये ऑनलाइन आहरित हो जाते हैं और उनके खाते में आ जाते हैं। इसके बाद संबंधित प्रमाण पत्र के ऑप्शन पर क्लिक करने पर राज्य चुनने के बाद रजिस्ट्रेशन फाॅर्म भरना होता है और कुछ ही मिनट में प्रमाणपत्र डाउनलोड हो जाता है। इसके लिए किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होती।
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