ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों को रुपयों का लालच देता था। उनके नाम पर बैंक खाते और फर्जी फर्में खुलवाई जाती थीं। इन्हीं फर्मों के नाम से फर्जी ई-वे बिल और खरीद-बिक्री के दस्तावेज तैयार होते थे। कागजों में कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया जाता था। फिर सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिये रकम को नकदी में बदला जाता था।
हवाला और सराफा कारोबार से जुड़ाव
एसपी क्राइम ने बताया कि फर्जी कारोबार से निकाली गई रकम को सराफा कारोबार, डिजिटल वॉलेट और हवाला नेटवर्क के जरिये ठिकाने लगाया जाता था। नकदी के बंटवारे के लिए गिरोह नोटों के सीरियल नंबर को कोड भाषा के रूप में इस्तेमाल करता था। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। बरामद दस्तावेज के आधार पर पूरे नेटवर्क की आर्थिक जांच भी हो रही है।