बरेली। मानसून आने में चंद दिन बाकी हैं। इसके बाद कुछ समय के लिए बिजली लाइनों की मरम्मत और रखरखाव के कामों की गति धीमी हो जाएगी। मानसून से पहले भी विद्युत निगम के कर्मचारी खुले में रखे ट्रांसफार्मरों, ट्रॉली ट्रांसफार्मरों और लटक रहे तारों को लेकर संजीदा नहीं हैं। शहर में कई स्थानों पर एक-एक माह के बाद भी फुंके ट्रांसफार्मरों को नहीं बदला गया है। ट्रॉली ट्रांसफार्मर रखकर काम चलाया जा रहा है। तार और खंभे लटक रहे हैं।
बीते दिनों आंधी-बारिश के बाद विद्युत निगम को आपूर्ति सामान्य करने में तीन दिन लग गए थे। अब मानसून के दौरान ज्यादा बारिश होगी। पुराना शहर के घने इलाकों में बिजली की लाइनें काफी नीचे लटक रही हैं। कुंवरपुर, बिहारीपुर में कई स्थानों पर बिजली के खंभे झुक गए हैं। बाकरगंज में तारों का मकड़जाल है। कटरा चांद खां, मौर्या मंदिर के आसपास लाइनों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। कुंवरपुर जसौली में एक माह से टूटा हुआ पेड़ बिजली की 11 केवी लाइन पर लटक रहा है।
शाहदाना, किला, कुतुबखाना, सिविल लाइंस तृतीय, जगतपुर, मढ़ीनाथ, सुभाषनगर उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब है। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर कवर्ड किए गए हैं, लेकिन रखरखाव ठीक से न होने के कारण यहां झाड़ियां उग आई हैं। इससे खतरा बना हुआ है।
आंधी सड़क घेरे खड़े ट्रॉली ट्रांसफार्मर
मानसिक रोग अस्पताल के पास एक माह पहले ट्रांसफार्मर फुंक गया था। यहां दूसरा ट्रांसफार्मर लगाने के बजाय ट्रॉली ट्रांसफार्मर से काम चलाया जा रहा है। कुंवरपुर में भी ट्रॉली ट्रांसफार्मर लगा है। ये ट्रांसफार्मर आधी सड़क घेर कर खड़े हैं। इससे एक ओर करंट और दूसरी ओर हादसों का खतरा बना हुआ है। कुंवरपुर में ही एक सप्ताह पहले बिजली के दो खंभे गिरकर दीवार से टिक गए थे। कई बार शिकायत के बाद भी इनको ठीक नहीं किया गया है।
वर्जन
जहां ट्रॉली ट्रांसफार्मर रखे हैं, उनको हटवाया जाएगा। खुले में रखे ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित किया जा रहा है। सभी एसडीओ को समय से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ज्यादातर स्थानों पर ट्रांसफार्मरों को कवर्ड किया जा चुका है।- धर्मेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता शहरी