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Bareilly News: प्रशिक्षु डॉक्टर कर रहे इलाज, दवा काउंटर भी नौसिखियों के हवाले

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बरेली। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था नौसिखियों के हवाले है। निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रशिक्षु डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। दवा काउंटर भी इंटर्न फार्मासिस्ट के हवाले है। लिहाजा, मरीजों को घंटों कतार में खड़े रहने के बावजूद बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की वजह से मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
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बरेली जिले के सीएचसी, पीएचसी, यूपीएचसी समेत बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर मरीज बरेली के जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में आते हैं। इससे ओपीडी पर मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है। सेवानिवृत्त होने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों और फार्मासिस्ट के पदों पर नई तैनाती भी नहीं हो रही है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
बीते दिनों अधिकारियों ने महिला अस्पताल का निरीक्षण किया तो कोई भी स्त्री रोग विशेषज्ञ मौके पर नहीं मिली थीं। प्रशिक्षु डॉक्टर ही गर्भवतियों और महिला मरीजों का इलाज कर रही थीं। तीन सौ बेड अस्पताल में भी त्वचा रोग विशेषज्ञ की ओपीडी प्रशिक्षु डॉक्टर के भरोसे है।
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नौ फार्मासिस्ट के भरोसे व्यवस्था, निभा रहे दोहरी जिम्मेदारी
जिला अस्पताल में फार्मासिस्ट के 16 स्वीकृत पदों के सापेक्ष नौ की तैनाती है। इनमें से एक-एक मेन स्टोर, सब स्टोर, इंजेक्शन, डिस्पेंसरी, रिकॉर्ड और एआरवी में तैनात हैं। शेष तीन चीफ फार्मासिस्ट में से एक की नाइट ड्यूटी होती है। ओपीडी के दौरान दवा वितरण दो फार्मासिस्ट के भरोसे है। रोजाना डेढ़ हजार मरीजों को छह काउंटर से दवा वितरित की जाती है। वहीं, 300 बेड अस्पताल में भी दो फार्मासिस्ट ही तैनात हैं। दोनों अस्पतालों में इंटर्न फार्मासिस्टों के भरोसे ही दवा वितरण व्यवस्था है। सालभर में बीसी यादव, दिनेश गंगवार सेवानिवृत्त हुए पर तैनाती सिर्फ एक की हुई है।

डॉक्टरों की स्थिति
जिला अस्पताल : फिजिशियन के तीन स्वीकृत पद के सापेक्ष एक, रेडियोलॉजिस्ट के दो पद के सापेक्ष एक, ऑर्थो के तीन के सापेक्ष दो की तैनाती है। चर्म रोग विशेषज्ञ, चेस्ट फिजिशियन, प्लास्टिक सर्जन, फॉरेंसिक विशेषज्ञ के पद रिक्त हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत नहीं हैं।
महिला अस्पताल : विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत 16 पद के सापेक्ष 10 की तैनाती। एमसीएच विंग में स्वीकृत 17 के सापेक्ष आठ की तैनाती। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के छह, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक के एक-एक पद रिक्त। चीफ फार्मासिस्ट के तीन में से दो पद रिक्त।
तीन सौ बेड अस्पताल : जिला अस्पताल और सीएमओ के अधीन डॉक्टरों से ओपीडी संचालित। चर्म रोग की ओपीडी में इंटर्न देख रहे हैं मरीज।
इंटर्न डॉक्टरों की लापरवाही के मामले
- पिछले साल महिला अस्पताल में कराई गई अल्ट्रासाउंड जांच में जुड़वां बच्चों की पुष्टि हुई थी। एक ही बच्चे का जन्म होने पर परिजनों ने हंगामा किया था। मामले की जांच में पता चला कि रेडियोलॉजिस्ट मौजूद न होने से इंटर्न ने गलत रिपोर्ट दे दी थी।
- जिला अस्पताल में इंटर्न डॉक्टर पर्चे पर साल्ट के बजाय दवाओं का ब्रांड नेम लिख रहे थे। मामला सुर्खियां बना तो जांच हुई। पता चला कि इंटर्न डॉक्टर ब्रांड नेम लिख रहे हैं। मरीजों को अस्पताल के बजाय निजी मेडिकल स्टोर भेजते थे।
- तीन सौ बेड अस्पताल में भी पूर्व में डॉक्टर मरीजों को देखकर बाहर की दवा लिख रहे थे। कुछ मरीजों ने आपत्ति की तो जांच हुई। इसमें इंटर्न डॉक्टर का कारनामा सामने आया। इंटर्न फार्मासिस्ट भी मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर भेज रहे थे।
वर्जन
अस्पताल में स्वीकृत के सापेक्ष विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने से जांच और इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को देखने में इंटर्न डॉक्टर सहयोग करते हैं। शासन से समय-समय पर विशेषज्ञों की तैनाती की मांग की जाती है। - डॉ. त्रिभुवन प्रसाद, सीएमएस महिला अस्पताल
विशेषज्ञ डॉक्टर ओपीडी के साथ वार्डों में विजिट भी करते हैं। तब तक इंटर्न डॉक्टर मरीजों को देखने में सहयोग करते हैं। गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ के परामर्श पर ही दवा लिखते हैं। फार्मासिस्ट कम होने से इंटर्न सहयोग कर रहे हैं। - डॉ. आरसी दीक्षित, सीएमएस, जिला अस्पताल
चर्म रोग की ओपीडी और दवा वितरण में इंटर्न का सहयोग लिया जा रहा है। करीब सात-आठ सौ मरीजों को दो फार्मासिस्ट दवा वितरण नहीं कर सकते हैं। अस्पताल संचालन के लिए सीएमओ ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। - डॉ. इंतजार हुसैन, सीएमएस, तीन सौ बेड अस्पताल
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