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फर्जी टिकट निकालते पकड़ा गया चीफ बुकिंग क्लर्क, जेल भेजा

बरेली ब्यूरो Updated Tue, 13 Aug 2019 02:02 AM IST
फर्जी टिकट निकालते पकड़ा गया चीफ बुकिंग क्लर्क, जेल भेजा - फोटो : अमर उजाला, बरेली

आरपीएफ विजीलेंस टीम को लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें

चोरी से अनभिज्ञ मंडल वाणिज्य प्रबंधक- बोले पता करूंगा

बरेली। इज्जतनगर मंडल की आरपीएफ विजीलेंस टीम ने फर्जी टिकट निकालने के आरोप में काशीपुर स्टेशन के चीफ बुकिंग क्लर्क को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। वह 2016 में भी रिजर्व टिकट ब्लैक करने के मामले में जेल जा चुका है। उधर, मंडल में होने वाली चोरियों से मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनभिज्ञ हैं। उनका कहना है कि उन्हें फर्जी टिकट बेचने की जानकारी नहीं है।
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विजीलेंस को प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की फर्जी टिकट बेचने की शिकायतें कई दिनों से मिल रही थीं, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ रहा था। सोमवार को आरपीएफ विजीलेंस इंस्पेक्टर मयंक चौधरी, एसआई राणा, कांस्टेबल ज्ञान सिंह, अशोक कुमार, हेमंत कुमार, प्रमोद कुमार ने काशीपुर में साधारण टिकट विंडों पर छापा मारा। उस समय चीफ बुकिंग क्लर्क प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने दस रुपये के टिकट को लंबी दूरी का टिकट बनाकर एक यात्री को बेचा ही था। टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। उसके पास 1240 रुपये भी मिले, जबकि ड्यूटी आने के समय उन्होंने रजिस्टर में चार सौ रुपये की एंटी दिखाई हुई थी। कार्रवाई के बाद उन्हें काशीप़ुर आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया गया। शाम को उन्हें जेल भेज दिया गया। विजीलेंस इंस्पेक्टर मयंक चौधरी ने बताया कि 2016 में उन्होंने गंज डुंडवारा स्टेशन पर तैनात प्रदीप कुमार को रिजर्व टिकट ब्लैक करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

ऐसे करता था धांधली

आरोपी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव फर्जी टिकट निकालने में माहिर बताया जाता है। वह दस रुपये मूल्य के टिकट को सिस्टम में फीड करके प्रिंटर को बंद करके ब्लैंक टिकट निकाल लेता था। जब कोई यात्री लंबी दूरी का टिकट लेने आता था तो सिस्टम में यात्रा का विवरण फीड करके ब्लैंक निकाले गए टिकट पर उस यात्री का टिकट छाप देता था। बाद में लंबी दूरी वाले टिकट को निरस्त दिखा देता था। इसके बाद दस रुपये रेलवे राजस्व में जमा करके बाकी रुपये अपनी जेब में रख लेता था। सोमवार को विजिलेंस टीम ने प्रदीप पर लगे आरोपों की पुष्टि भी इसी आधार पर की। टीम के सदस्यों का कहना था कि टिकट रोल पर जो नंबर प्रिंट था और जो नंबर सिस्टम ने छापा था उसमें अंतर था। टिकट के रोल पर लिखा नंबर 7076 था, जबकि सिस्टम ने 7077 छापा हुआ था। टीम ने जब 7076 की डिलेट देखी तो वह मात्र दस रुपये का था, जबकि 7077 नंबर का टिकट निरस्त दिखाया हुआ था।

टिकट रोल में आटोमेटिक नंबरिंग से पकड़ी गई धांधली

टिकट के रोल में आटोमेटिक नंबरिंग होती है। जब कोई बुकिंग क्लर्क अपना काम शुरू करता है तो सबसे पहले रोल पर लिखा नंबर सिस्टम में फीड करता है। यह नंबर टिकट जारी होने के बाद सिस्टम में स्वत: बदलता रहता है। यानी जो नंबर कंप्यूटर की स्क्रीन पर चल रहा होता है वही नंबर छापे जाने वाले टिकट रोल पर भी दर्ज होता है। इसके अलावा टिकट पर भी सिस्टम अपना नंबर छापता है जो टिकट रोल पर पहले से लिखे नंबर से मैच करता है। यही प्रक्रिया ड्यूटी बदलने के दौरान चार्ज हैंडओवर करने के समय भी दोहराई जाती है।

मंडल की साधारण टिकट और रिजर्व विंडों में क्या हो रहा है, उन्हें जानकारी नहीं है। वह शिकायत आने पर कार्रवाई करते हैं।
- एनके जोशी, मंडलीय वाणिज्य प्रबंधक, इज्जतनगर मंडल
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