सेंथल। हजरत इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की याद में कस्बे में चल रही अजादारी के सिलसिले में सोमवार को दरगाह हजरत अब्बास से मशाल जुलूस निकाला गया। इसमें मजलिस-ए-हुसैन बरपा हुई। 18 बनी हाशिम के ताबूत और परचम-ए-अब्बास की जियारत कराई गई।
सोमवार को मुहर्रम के ग्यारहवें दिन दरगाह हजरत अब्बास में इदार-ए-ईमाने अबुतालिब के नेतृत्व में मजलिस-ए-अजा आयोजित की गई। मजलिस को जाकिर-ए-अहलेबैत शाहीन रजा जैदी ने खिताब किया। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके कुनबे पर यजीदी फौज की ओर से किए गए अत्याचारों को बयान किया।
शाम-ए-गरीबा के मसाएब बयान करते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद ख्यामे हुसैनी में आग लगा दी गई। औरतों और बच्चों को बंदी बना लिया गया। जिसे सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं। मजलिस के बाद मशाल जुलूस निकाला गया। इसमें 18 बनी हाशिम और परचमे अब्बास की जियारत कराई गई।
जुलूस के दरगाह से बाहर निकलते ही अंजुमनों ने मातमी दस्ते लगा लिए। या हुसैन की मातमी सदाओं के बीच मशाल जुलूस इमामबाड़ा कला पहुंचा। यहां मौलाना गजनफर अली ने तकरीर की। मौलाना ने 18 बनी हाशिम की शहादत को बयान किया।
अलविदा या हुसैन की गूंजीं सदाएं
फतेहगंज पूर्वी। नगर के अलग-अलग चौराहों पर सोमवार को सराय खाम, जमींदारन, काशयावान आदि मोहल्लों के साथ ही पड़ोसी गांव लाईखेड़ा के ताजियेदार अपने-अपने ताजिये लेकर पहुंचे। इस दौरान अलविदा या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। नगर वासियों ने ताजियेदारों पर पुष्पवर्षा की। जगह-जगह लंगर व सबील लगाई गई। देररात बहगुल नदी के पास ताजिये दफन किए गए। शाहपुर बनियान गांव में भी जुलूस निकाला गया। संवाद