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शौचालय घपले में पूर्व प्रधान और सचिव पर मुकदमा

Fri, 15 Apr 2016 02:04 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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निर्मल भारत अभियान के तहत गरीब परिवारों में बनने को आए शौचालयों के निर्माण के पैसे के दुरुपयोग के मामले में सपा नेता और मेहतरपुर के पूर्व ग्राम प्रधान ओमपाल सिंह यादव तथा ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ आखिरकार मुकदमा दर्ज हो गया। भुता थाना पुलिस ने डीपीआरओ की तहरीर पर बृहस्पतिवार को मुकदमा दर्ज कर लिया। मुकदमे के आदेश डीएम ने दिए थे लेकिन थाना पुलिस टालमटोल कर रही थी लेकिन एसएसपी के कड़े रुख के बाद थाना प्रभारी को डीपीआरओ कार्यालय से तहरीर मंगाकर रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी।
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इस मामले की जांच मेहतरपुर गांव निवासी आलोक यादव की शिकायत पर की गई थी। डीएम ने जांच के आदेश दिए थे और डीपीआरओ और सहायक डीपीआरओ वीके सिंह ने जांच की थी। जांच में पूर्व प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव को पैसा लेने के बाद भी शौचालयों का निर्माण न कराने के लिए दोषी पाया गया था। छह महीने पहले जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन डीपीआरओ टीसी पांडेय ने भुता थाने में एफआईआर के लिए तहरीर भिजवाई थी। आरोप है कि थाना पुलिस ने एफआईआर नहीं लिखी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सूचना अधिकार अधिनियम में डीपीआरओ से इस मामले की जांच रिपोर्ट और एफआईआर के लिए लिखी गई तहरीर की कापी ली। डीएम से मिलकर एफआईआर दर्ज न होने की शिकायत दर्ज कराई तो डीएम गौरव दयाल ने थाना प्रभारी को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए लेकिन फिर भी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की और कह दिया कि जांच कराएंगे फिर रिपोर्ट दर्ज करने पर निर्णय लेंगे। इसके बाद शिकायतकर्ता एसएसपी से मिले। एसएसपी ने थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए तो जाकर अब रिपोर्ट दर्ज हो सकी।

यह था मामला
भुता ब्लाक के मेहतरपुर करोड़ गांव में पूर्व प्रधान ओमपाल सिंह यादव के कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2007-08 में रोशन लाल, रामादेवी, इन्द्रपाल, श्रीपाल, ज्वाला प्रसाद, लालता प्रसाद, ओमप्रकाश, गुलफाम सिंह और महावीर समेत 20 पात्रों के शौचालयों का तीस हजार रुपया और फतेहपुर मजरा में दो शौचालयोें के निर्माण का पैसा निकाला गया लेकिन शौचालयों का निर्माण नहीं कराया। जांच में 50 हजार रुपये के दुरुपयोग की पुष्टि हुई। वहीं, पूर्व प्रधान ओमपाल सिंह यादव का कहना है कि शिकायतकर्ता आलोक यादव के पिता श्याम सिंह यादव भी गांव के प्रधान रहे। उनके खिलाफ उन्होंने वर्ष 2013 में मिडडे मील वितरण की शिकायत की थी। इसकी जांच के बाद सचिव कुलदीप पांडेय को जेल जाना पड़ा और प्रधान के घर की कुर्की हुई। इसकी रंजिश में आलोक ने झूठी शिकायत की और राजनीतिक दबाव के कारण निष्पक्ष जांच नहीं की गई।
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