बरेली। दबतरा रेलवे स्टेशन पर डकैती के मामले में दोषी करार दिए गए बदायूं के थाना बिसौली के गांव लक्ष्मीपुर निवासी शादाब, संग्रामपुर के इजहार, थाना इस्लामनगर के नसरौल निवासी निसार और संभल के बनियाठेर थाने के मोहम्मदगंज निवासी अशिक अली का लंबा आपराधिक इतिहास है। बिसौली थाने के दबतरा निवासी दीमक उर्फ दीमका उर्फ नजारिक खां भी डकैती में शामिल था। बाद में आपसी झगड़े में शादाब ने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर दीमक और उसके भाई गदम्मा की हत्या कर दी थी।
बिसौली के गांव लक्ष्मीपुर, संग्रामपुर और दबतरा आसपास ही हैं। ऐसे में शादाब, इजहार और दीमक के बीच दोस्ती थी। कुछ ही दूरी पर नसरौल गांव है। वहां का निसार भी इनके गिरोह में शामिल हो गया। सभी ने मिलकर अक्तूबर 2010 में डकैती डाली थी। दीमक उर्फ दीमका उर्फ नजारिक का एक भाई गदम्मा भी आपराधिक प्रवृत्ति का था। डकैती के कुछ समय बाद ही दीमक और शादाब के बीच तकरार हो गई। इसके बाद शादाब परिवार के साथ रामपुर के थाना शाहबाद के गांव मितरपुर में रहने लगा।
शादाब ने मार्च 2014 में बहाने से दीमक और उसके भाई गदम्मा को मितरपुर बुलाया। अपने तीन अन्य साथियों के साथ दोनों की हत्या कर दी। शव को कई टुकड़ों में काटने के बाद खेत में दफन कर दिया। दोनों के शव 15 दिन बाद बरामद हुए थे। शादाब अब भी बदायूं जेल में बंद है। मंगलवार को वह पुलिस अभिरक्षा में ही कोर्ट लाया गया। उसका परिवार अब भी मितरपुर में रहता है। दीमक के परिवार ने गांव छोड़ दिया है।
दीमक का इलाके में था खौफ, पुलिस का मिलता था संरक्षण
दीपक उर्फ नजारिक का इलाके में खौफ था। बताते हैं कि वह जिसके पीछे लग जाता था, उसको दीमक की तरह खत्म कर देता था। दोनों भाइयों को स्थानीय पुलिस का संरक्षण भी रहता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि मार्च 2014 में जब हत्या के बाद दीमक और गदम्मा के शव गांव पहुंचे तो भीड़ जुट गई थी। संवाद
छविराम।