बरेली। भैया दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है, जो रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक कर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस बार पर्व सौभाग्य और शोभन योग में मनाया जाएगा। वैसे तो द्वितीया तिथि की शुरुआत शनिवार को रात्रि 8:21 मिनट से ही हो चुकी है। रविवार को पूरे दिन व्याप्त रहने के बाद रात्रि 10:04 पर इसका समापन होगा।
ज्योतिषाचार्य मुकेश मिश्रा के अनुसार भैया दूज का पर्व सौभाग्य और शोभन योग के संयोग में होगा, जिस कारण इस पर्व का महत्व कई गुना अधिक बढ़ गया है। सौभाग्य योग जहां भाग्य को जागृत करता है। वही शोभन योग परमात्मा की कृपा से सुशोभित करता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपने बहनों को उपहार देकर उनके सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं।
इस पर्व को भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रात द्वितीया ,भाऊ बीज, भतरु द्वितीया आदि नामों से जाना जाता है। भाई दूज के दिन ही पंच दिवसीय दीपोत्सव का समापन भी हो जाता है। इसके अलावा इसी दिन व्यापारी अपने तराजू और बही खातों व कायस्थ समाज के लोग कलम दवात से चित्रगुप्त महाराज की पूजा करते हैं।
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भैया दूज पूजा विधि
भाई दूज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान करें, फिर घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर ईश्वर का ध्यान करें। इसके दिन यमराज और यमुना के साथ भगवान गणेश और भगवान विष्णु की पूजा का भी विधान है। इस दिन पिसे चावल से चौक बनाने की परंपरा भी है। इसके बाद बहनें, भाई को तिलक लगाएं और फिर आरती उतारें। आरती के बाद हाथ में कलावा बांधें और मिठाई खिलाएं। इसके बाद बहनें, भाई के हाथ में नारियल दें और फिर भाई को भोजन करवाएं। भोजन के बाद भाई, बहनों को उपहार दें और चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें।
भाई दूज का चौघड़िया मुहूर्त
शुभ का चौघड़िया प्रातः 7: 43 से 9:05 तक।
चर, लाभ, अमृत का चौघड़िया मध्यान्ह 11:51 से 3:59 तक।
लाभ का चौघड़िया शाम 5:21से 6:59 तक।
इस दौरान न करें तिलक
प्रातः 9:05 से 10:28 तक राहुकाल रहेगा इस दौरान भाई दूज न करें।
संवाद