बरेली। विश्व रंगमंच दिवस पर गुरुवार को ‘थिएटर कल, आज और कल’ विषय पर एसआरएमएस रिद्धिमा में परिचर्चा रही। परिचर्चा में एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति ने कहा कि सरकार या समाज की मदद से कुछ हद तक थिएटर को जिंदगी मिल सकती है। रंगकर्मियों को लेकिन थिएटर को चमकाने के लिए खुद बदलाव करना और तपना ही होगा।
ट्रेन टू पाकिस्तान सहित कई फिल्मों के निर्देशक दिल्ली निवासी अमर साह, अभिनेता व निर्देशक के साथ कठपुतली कलाकार शाहजहांपुर निवासी कप्तान सिंह कर्णधार, राजेंद्र घिल्डियाल, थिएटर से जुड़ी और फिल्म अभिनेत्री शुभा भट्ट भसीन, कहानीकार व रंगकर्मी गुडविन मसीह, सीरियल अभिनेत्री नीलम वर्मा और रंगकर्मी विनायक कुमार श्रीवास्तव ने बेबाकी से अपनी बात रखी। परिचर्चा का संचालन सौरभ गुप्ता ने किया।
ड्रामा ड्रॉपआउट्स (कल्चरल विंग ऑफ अस्तिता) के स्थानीय कार्यालय पर भी ‘रंगकर्म नई नजर से’ विषय पर चर्चा की गई। इसमें कहा गया कि रंगकर्म को लेकर देश, शहर, राज्य में यदा-कदा कुछ न कुछ कार्यक्रम होते रहते हैं, जिनका उद्देश्य अधिकांश दिखावा होता है, यहां सबसे गहन और गंभीर सवाल यह है कि इसमें रंगकर्म कहां है..? इस चर्चा में राजू चौहान, बृजेश तिवारी, अंबुज कुकरेती, मोहित सिंह, लव तोमर आदि थे। मानव सेवा संस्थान ने रंगमंच दिवस जीआईसी के ऑडिटोरियम में मनाया। अध्यक्ष बिंदु सक्सेना ने कहा कि कलाकारों को प्रदेश सरकार की ओर से आज तक कोई भी नि:शुल्क मंचन करने और अभ्यास करने का को कोई भी ऑडिटोरियम नहीं है। संवाद